अक्षर: क
अक्षर 'क' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंकौन कान में कौर जात।
कौन कान में कौर चला जायगा। किसी कार्य के लिए जल्दी मचाने पर।
कौन कौन गुन गायें अपने राम के।
किसी की करतूतों का बखान करते समय व्यंग्य में। अर्थात हम इनकी क्या क्या बात कहें।
कौन जनम भरे की साई1 लई।
(1.वह रकम जो मजदूरों को काम पर नियुक्त करने के उद्देश्य से बयाने के रूप में पेशगी दी जाती है।) क्या काम करने का जन्म भर का ठेका लिया है? उस समय प्रयुक्त जब किसी आदमी से बारंबार किसी एक काम को करने के लिए कहा जाय।
कौन तुम इतै गुना1 गोंठ रये।
(1.एक पकवान विशेष जो मोटा और कुंडलाकार होता है और जिसे दर्शनीय बनाने के लिए किनारों पर चारों ओर से गोंठते हैं। यह प्रायः दहेज के साथ देने को बनता है।) अर्थात कौन तुम यहाँ बड़ा भारी काम कर रहे हो। जब घर का कोई छोटा व्यक्ति कोई काम करने या कहीं जाने से इन्कार कर दे प्रायः तब।
कौन तुम इतै म्यौर1 कौ मूड़ा साद रये।
(1.घर के छप्पर को साधने के काम आनेवाली वह मोटी लकड़ी जिसके सहारे बड़ेरे की लकड़ी रखी जाती है। भारी होने के कारण इसे दीवारों पर उठा कर रखने के लिए कई आदमियों की आवश्यकता पड़ती है।) कौन तुम यहाँ म्याँर का सिरा साध रहे हो ? अर्थात तुम यहाँ कौन सा महत्वपूर्ण काम कर रहे हो।
कौन तुमईं अकेले ने मताई कौ दूध पिओ।
कौन तुम्हीं अकेले ने माँ का दूध पिया है। अर्थात तुम्हीं बड़े शूरवीर नहीं हो। हममें भी कुछ बूता है।
कौन तुमाई टाँक1 से टाँक जोर कें खानें।
(1.जाँघ।) हमें कौन तुम्हारी जाँघ से जाँघ मिला कर बैठना और खाना है। अर्थात हमें तुमसे क्या मतलब? क्यों हमें आँखें दिखाते हो ?
कौनें अपनी मताई कौ दूद पिओ।
किसने अपनी माँ का दूध पिया है? कौन इतना बहादुर है ?
कौरई कौरा कौ पुन्न।
थोड़े-थोड़े का ही बहुत पुण्य होता है। अथवा थोड़े-थोड़े का ही पुण्य सही।
क्वाँर करेला, कातिक दही। मरै नहीं तौ परै सही।
क्वाँर में करेला और कातिक में दही खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकर होता है।
क्वाँर के झला1, साब के लला।
(1.यकायक आ जाने वाला पानी का हलका झोंका।) क्वाँर के महीने में पानी के झोंके उसी प्रकार सहसा रह-रह कर आते हैं जिस प्रकार बड़े आदमी का निठल्ला लड़का गाँव की गलियों में कभी इघर से निकल जाता है, कभी उधर से।
क्वाँरी कन्या कों बर और धरती कों बीज मिलई जात।
क्वाँरी कन्या के लिए वर और खेत में बोने के लिए बीज कहीं न कहीं से मिल ही जाता है।
क्वाँरी कन्या कों सौ बर।
क्वाँरी कन्या के लिए वर की कमी नहीं रहती। मिल ही जाता है।