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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: क

अक्षर 'क' से शुरू होने वाली कहावतें

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कुतियाँ प्रागै जेयँ तौ हँड़िया को चाट ?

कुतियाँ प्रयाग जायेंगी तो फिर हाँड़ी कौन चाटेगा ? यदि छोटे आदमी बड़ा काम करने लगें तो फिर छोटों का काम कौन देखेगा ?

कुत्तन के भिरे में कनक कौ दिया।

कुत्तों के बीच में कनक का दिया ! यदि रख दिया जाय तो वे उसे तुरंत खा जायेंगे।

कुत्ता की पूँछ बारा बरसें पुँगरिया में राखी, जब निकरी तब टेड़ी की टेड़ी !

कुत्ते की पूँछ बारह वर्ष तक नली में रखी गयी, परन्तु जब निकली तब टेड़ी की टेढ़ी। किसी मनुष्य की बुरी आदत कठिनाई से छूटती है।

कुत्ता के पेट में घी नईं पचत।

ओछे आदमी के पेट में कोई बात नहीं रहती। अथवा ओछे के पास पैसा हो जाय तो वह उसे छिपा कर नहीं रख सकता।

कुत्ता घसीटी में परबो।

ऐसे काम में पड़ना जिसमें व्यर्थ की खींचातानी सहनी पड़े।

कुत्ता हों ईंटई सूजत।

कुत्ते को ईंट ही सूझती है। बुरे का ध्यान बुरी ओर ही जाता है।

कुनेंते1 से पड़ा बँधो।

(1.कुनेंता धान दलने की चक्की जिसका नीचे का पाट मिट्टी का और ऊपर का पत्थर का होता है। यह होले से चलायी जाती है। उसे पड़ा अथवा किसी अन्य जानवर से खिचवाना मूर्खता है।) कुनते से पड़ा बंधा है, अर्थात दो वस्तुओं का बेमेल जोड़ है।

कुमाँर कभहुँ साजे बासन में नईं खात।

कुम्हार कभी अच्छे बर्तन में खाना नहीं खाता। अच्छे और साबित बर्तन वह बेचने के लिए रखता है।

कुम्हेंड़े फंसे जउआ1।

(1.लौकी, कद्द आदि के मादा फूल की बौंड़ी।) कुम्हड़े के जौए की तरह सुकुमार।

कुरयाऊ हाट लगी।

कोरियों की हाट लगी है। अर्थात बड़ा शोरगुल हो रहा है।

कुरयाने पावन भई।

कोरियों के मुहल्ले में त्यौहार हुआ। विलक्षण बात हुई।

कूकुर को मुंस लड़इया1।

(1.गीदड़।) एक के लिए दूसरा बढ़ कर।

कै उठै, कै भांवर पारै।

किसी काम के लिए जल्दी मचाना।

कै कढ़े मरम मिलत, कै मरें।

या तो स्वयं करने से किसी बात का ज्ञान प्राप्त होता है, या फिर अपने को बिलकुल खपा देने से।

कै खाय घोड़ा, कै खाय रोरा।

या तो घोड़ा रखने में खर्च होता है, या मकान बनवाने में।

कै नौ मैदा की, कै फिर ठनका की।

या तो नौ मैदा की चाहिए, या फिर बिलकुल भूखे रहेंगे।

कै बर्स भीतरी, के बर्स तीसरी।

द्विरागमन के संबंध में प्रचलित नियम कि वह या तो विवाह के उपरान्त एक वर्ष के भीतर हो जाना चाहिए, अथवा फिर तीसरे वर्ष।

कै बसै हजारी, कै बसै कबाड़ी।

बड़े शहर में या तो धनाढ्य ही रह सकता है या फिर कबाड़ी।

कै सोवे राजा कौ पूत, फै सोवे जोगी अबधूत।

संसार में राजा-महाराजाओं या जोगी अवधूतों को छोड़ कर ऐसे बहुत कम मनुष्य होते हैं जिन्हें कोई चिन्ता न हो।