अक्षर: ग
अक्षर 'ग' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंगई परथन लैन, कुत्ता पींड़1 लै गओ।
(1-गुँदे हुए आटे की पिडी।) एक काम करने गये तब तक दूसरा चौपट हो गया।
गओ मरद जीने खाई खटाई, गई राँड़ जीने खाई मिठाई। गगरी में नाज गँवारे राज।
घर में खाने को होने पर गंवार सीधे बात नहीं करता।
गंगा गयें मुंडायें सिद्ध।
सामने आ गये काम को पूरा कर डालने में ही समझदारी है।
गड़वाँत1 के पथरा।
(1-गाड़ी के आने-जाने का कच्चा रास्ता।) ऐसा निरीह और असहाय व्यक्ति जिसे चाहे जो रौंदता और कुचलता चला जाय।
गदन की गोने1, मनन की झोलें।
(1-गोन का ब. ब., बढ़ी खेस जिसमें लगभग पांच मन अनाज आता है।) थोड़े हिसाब-किताब में लंबी-चौड़ी भूल।
गदन की बातें, लड़इयन की लातें।
गधों की बातें और गीदड़ों की लातें। मूर्ख की बेतुकी बात।
गदा के कान गदई खुजाउत।
गधा के कान गधा ही खुजाता है। ओछों की मित्रता ओछों से ही होती है।
गदा गदइया से जीते नई, रेंगटा1 के कान मरोरे।
(1-गधा का बच्चा।) गधा गधी से तो जीतता नहीं बच्चे के कान ऐंठता है।
गदा धोये से घोड़ा नई होत।
प्रयत्न करने पर भी किसी की प्रकृति नहीं बदली जा सकती।