अक्षर: ग
अक्षर 'ग' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंगोबर गिरत तौ कछू लेई कें उठत।
गोबर गिरता है तो कुछ लेकर ही उठता है। उसमें जमीन की मिट्टी लग जाती है। जब कोई आदमी विवश होकर किसी के सामने झुकता है, अथवा किसी को कोई सुबिधा प्रदान करता है, तो उससे भी वह अपना कोई न कोई मतलब निकाल ही लेता है।
गोबर मैला नीम की खली। यातें खेती दूनी फली।।
गोबर, मैला और नीम की खली की खाद देने से खेती को विशेष लाभ होता है।
गोली कौ घाव भर जात, पै बोली कौ नई भरत।
गोली का घाव भर जाता है। पर बोली का नहीं भरता।
गोली सें बचै, पै बोली से न बचें।
गोली से बचना आसान है, परंतु बात की चोट से नहीं बचा जा सकता।
गौर रूठें तौ अपनी सुहाग लें, का कोऊ कौ भाग लें (एँ)।
गौर रूठेंगी तो अपना सुहाग लेंगी, क्या किसी का भाग्य लेंगी ?