अक्षर: घ
अक्षर 'घ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंघर में खावे खों नई, ढाबे पै धुँआ करें।
घर में तो खाने को नहीं, छत पर धुआँ कर रहे हैं जिसमें लोग समझें कि कुछ पक रहा है।
घर में नइयाँ चून चनन कौ, ठाकुर बरी करावें। मो दुखनी कों लाँगा नइयाँ कुत्तन झूल डरावें।।
घर में खाने को न होने पर भी ठाट-बाट का दिखावा करना।
घर, घोड़ा, गाड़ी, इन तीनन के दाम खड़ा खड़ी।
घर, घोड़ा, गाड़ी, इन तीनों के दाम तुरन्त ले लेना चाहिए।
घरइया कों घर बाँद आऊत।
घर-गृहस्थी वाले आदमी को घर का सब प्रकार का प्रबंध करना आता है।
घरई की अछरू माता, घरई के पंडा।
जब कोई व्यक्ति आपस वालों से अनुचित लाभ उठाये, अथवा जहाँ मालिक और नौकर एक दूसरे की सलाह से कोई चीज दूसरों को दे रहे हों वहाँ प्रयुक्त।
घरई की कुरइया1 से आँख फूटत।
(1-छप्पर के छावन में लगने वाली लकड़ी। यह प्रायः ओलती से बाहर निकली रहती है और ओलती यदि नीची हो तो उसके आँख में लगने का डर रहता है।) घर के आदमी से ही अधिक हानि पहुँचती है।
घरबारो मेड़ में, मेंड़-कटा खेत में।
खेत का मालिक तो मेड़ पर खड़े होकर खेत की रक्षा कर रहा है, परन्तु मेंड़ पर की घास को चोरी से काट कर ले जाने वाला खेत में घुसा है और अधिक स्वच्छंदता पूर्वक चोरी कर रहा है।
घरी भरे कौ बुरआसन, सब दिन कौ आराम।
किसी को किसी वस्तु के लिए नाहीं करने से केवल थोड़ी देर की बुराई अवश्य पैदा होती है, परन्तु उससे सदैव के लिए झगड़े से छुट्टी मिल जाती है क्योंकि वह फिर दुबारा माँगने नहीं आयेगा।
घरी में घर जरै, नौ घरीं भद्रा1।
(1-बाधा, फलित ज्योतिष के अनुसार एक योग जिसमें कोई काम करना ठीक नहीं माना जाता।) ऐन मौके पर जब कोई टालमटोल करे, अथवा कोई अप्रत्याशित बाधा आ जाय तब कहते हैं।
घवा1 में घवा डार दओ।
(1-घाई, दो उँगलियों के बीच का स्थान।) पंजे में पंजा डाल दिया।
घसया घोड़ा, रुटया चाकर।
केवल घास खाकर रहने वाला घोड़ा, और रोटियों पर रखा गया नौकर, ये दोनों ही निकम्मे होते हैं।