अक्षर: घ
अक्षर 'घ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंघिसे बिना चिलक नईं आऊत।
आदमी को दबाये बिना काम नहीं निकलता। घिसने का अर्थ खुशामद करना भी हो सकता है। खुशामद किये बिना काम नहीं बनता।
घी देतन नर्रयात। अथवा घी देतन बामन नर्रयात।
भलाई करते बुराई मानते हैं। जाड़े के दिनों में घोड़े को स्वस्थ रखने के लिए घी दिया जाता है, जिसे वह आसानी से नहीं खाता।
घुल्ला जा पार के बा पार।
घोड़ा इस पार या उस पार। परिणाम कुछ भी हो, काम करना ही है।
घूँटे नउत तब पेटई कों।
घुटने पेट ही को नवते हैं। आत्मीय जनों का सब पक्ष लेते हैं।
घोड़ा की लात घोड़ई सऊत।
घोड़े की लात घोड़ा ही सहन कर सकता है। बड़ों की ठोकर बड़े ही सहन करते हैं।
घोड़ा कौ पछारी और हाकिम की अँगारी। (इनसें बचें चइये)
घोड़े के पीछे खड़े होने से दुलत्ती लगने का डर रहता है और हाकिम के आगे चलना धृष्टता है। इनसे बच कर चलो।
घोड़ा घास से यारी करें तौ खाय का ?
प्रायः रिश्वत लोरों के लिए व्यंग्य में कहते हैं।