अक्षर: घ
अक्षर 'घ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंघोड़ा जोड़ा मिलै भाग सों।
सवारी के लिए घोड़ा और अच्छी स्त्री भाग्य से ही मिलती है।
घोड़ा दूर, के मैदान ?
न घोड़ा दूर, न मैदान। सब वस्तु तुम्हारे सामने है, परीक्षा करके देख लो।
घोर, मोर, सोर1, पानी पियें बड़े भोर।
(1-शवर जाति के लोग, सहरिया।) घोड़ा, मोर और सहरिया ये तीनों प्रातःकाल उठ कर पानी पीने के अभ्यस्त होते हैं।
घोसिया1 घोकत रओ, कमरिया2 ब्या लै गओ।
(1-दूध-दही का व्यापार करने वाली एक जाति। 2-अहीरों की एक जाति।) घोसी तो सोच-विचार में ही पड़ा रहा और कमरिया उस स्त्री को व्याह कर ले गया जिसके साथ घोसी विवाह करना चाहता था। काम न करके केवल मन के लड्डू खाना।