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अक्षर: च

अक्षर 'च' से शुरू होने वाली कहावतें

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चोर के पाँव (अ) इँ किते ?

चोर के पैर ही कितने। दोषी जाँच करने पर नहीं ठहरता।

चोर खों चोर बसात।

चोर को चोर की गंध आती है। अर्थात चोर चोर को पहिचान लेता है।

चोर चोर मौसयायते भैय्या।

एक पेशे या एक स्वभाव के लोगों में आपस में शीघ्र मित्रता हो जाती है। एक की झूठ बात का जब दूसरा समर्थन करे तब।

चोर चोरी से गओ, तौ का टारा-फेरी सें गओ।

किसी का जन्मजात स्वभाव आसानी से नहीं छूटता।

चोर जाने चोर की घाई।

चोर ही चोर की घात जानता है।

चोरन कुतिया मिल गई पहिरो कहु को देय।

घर का आदमी ही यदि विरुद्ध हो जाय तो काम कैसे चले ?

चोरी और मों जोरी।

अपराध करके उल्टे जवाब देना।

चोरी-चोराँ खेती करी, जोतो का मँझोटो ?

चोरी से खेती करके क्या आँगन जोतोगे ? बड़ा काम चोरी-छिपे नहीं होता।

चोली1 के पान।

(1-चुलिया, बाँस का बना छोटा डिब्बा) सुकुमार वस्तु, विशेषकर दूध पीते. छोटे बच्चों के लिए प्रयुक्त। पान जिस प्रकार जल्दी सूखते हैं उसी प्रकार छोटे बच्चों को भी रोग जल्दी सताते हैं।

चौदा विद्या निधान।

सब कलाओं में प्रवीण। व्‍यंग्‍य में।

चौपर के खिलैया।

शतरंज के खिलाड़ी, चतुर व्यक्ति।

चौबे गये छब्बे होबे, दुबेई रै गये।

चौबे छब्बे होने गये, दुबे ही रह गये।

चौमासे के रिपटे और राज के पिटे कौ का डर।

चौमासे में रिपट कर गिर पड़ने और राज्य के द्वारा पिटने का डर क्या ?