अक्षर: च
अक्षर 'च' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंचुन चुन गये मोरा। बीद गओ लिड़बोरा1।।
(1-लिड़ौरा, नर मोर।) मोरनियाँ थीं, चुन चुन कर चली गयीं, मोर फँस गया। होशियार आदमी तो काम बना कर चलता बना, मूर्ख चक्कर में आ गया।
चुरियाँ लादीं पाठे परीं। खाँड़ लादी दौ में परी।।
सब प्रकार से दुर्भाग्य। किसी आदमी ने चूड़ियों का व्यापार किया तो जिस बैल पर वह उन्हें लाद कर लिये जा रहा था, एक चट्टान पर उसका पैर फिसल गया। चूड़ियाँ नीचे गिर पड़ों और फूट गयीं। इसी प्रकार जब वह एक बार शक्कर लाद कर ले जा रहा था तो उसे एक नदी पार करनी पड़ी और बैल के बिदकने से सब शक्कर पानी में गिर पड़ी और घुल गयी।
चूले की नकरियाँ चूलेई में जरतीं।
चूल्हे की लकड़ी चूल्हे में ही जलती हैं। जहाँ की वस्तु वहीं काम आती है।
चूले खों लूगर बताउत।
चूल्हे को जलती हुई लकड़ी बतलाते हैं। जानकार को सिखाना; अथवा जो आदमी जिस बात का अभ्यस्त है उसे उसी बात का भय दिखा कर डराना।
चूले में बिलइयाँ डंडोतें करतीं।
चूल्हे में बिल्लियाँ दंडवत करती हैं। घर में खाने को नहीं।
चूलो खोदें खाट बिछत।
घर में स्थान की इतनी कमी है कि चूल्हा खोद डालने पर ही खाट बिछ सकती है।
चेरी कौ चित्त महेरी में। (कि कब बने और कब खाऊँ)
बार-बार अपने ही मतलब की बात करना।
चैत मीठी चीमरी बैसाख मीठो मठा। / जेठ मीठी डोवरी1 असाढ़ मीठे लटा2।। / सावन मीठो खीर-खांड़ भादों भुंजे चना। / क्वाँर मीठी काकरी ल
(1-महुओं की खीर, जो महुओं को चावल या सिमई के साथ पानी में पका कर बनायी जाती है। 2-भुने हुए महुओं को गुड़ के साथ कूट कर बनाया गया पदार्थ, यह तिलपट्टी की तरह होता है। 3-नमक।)
चैत सोवे रोगी, क्वाँर सोवे भोगी।
दिन में चैत के महीने में रोगी और क्वाँर के महीने में भोगी सोता है।
चोंखरे कौ जाव बिलई करकोरत।
चूहे की संतान बिल ही खोदती है। जिसके घर में जो काम होता रहता है वह बचपन से उसी को सीखता और करता है।
चोंटिया लेओ, न बकौटो भराओ।
न किसी को चुटकी लो और न वह तुम्हें हथेली से नोंचे।
चोर के घरै छिछोर।
चोर के घर भी दूसरे छोटे-मोटे चोर घुस ही जाते हैं। अथवा चोर के घर भी छछोवा करने वाले घुस जायें तो यह एक आश्चर्य की ही बात है।