अक्षर: त
अक्षर 'त' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंतुमाओ सो हमाओ, हमाओ सो हें हें !
ऐसे आदमी के लिए जो अपने मतलब की ही बात करे।
तुमाये चाटे तौ रुआँ नई जमत।
तुम्हारे चाटे हुए तो रोम नहीं जमते। तुम जिस पर कृपा करते हो उसका सत्यानाश ही होकर रहता है। व्यंग्य में।
तुमाये जैसे तौ हमाई अंटी1 में बँदे।
(1-गाँठ।) अर्थात् हमें तुम्हारी परवाह नहीं।
तुमाये मठा की तौ आय कड़ी बगरवाई।
तुम्हारे मठे की तो हमने कढ़ी तैयार करायी है! अर्थात् हम क्या तुम्हारा मठा लेने गये थे ? व्यर्थ का अहसान जताये जाने पर कहते हैं।
तुरत दान, महा कल्यान।
किसी को कोई वस्तु देनी ही है तो फिर तुरंत दे देनी चाहिए।
तेजाब के डूबे हैं।
खूब खरे रुपये हैं। तेजाब में डुबो कर उनकी परीक्षा कर ली गनी है। व्यंग्य में ऐसे आदमी के लिए प्रयुक्त जो खूब घिसा-पिसा और अनुभवी हो।
तेल जरै, बाती जरे, नाव दिया कौ होय।
कष्ट उठा कर काम कोई करे, यश किसी को मिले।
तेल तौ तिलनई में से निकरत।
मुनाफा तो मुनाफे वाली वस्तु से ही उठाया जा सकता है।
तेल देखो, तेल की धार देखो।
किसी काम में जल्दी करना ठीक नहीं। धैर्य-पूर्वक परिणाम की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
तेल न ताई,1 लगुन दै लिखाई।
(1-तैय्या, जलेबी, मालपुआ आदि बनाने की कढ़ाही।) न तो तेल है और न कढ़ाही, विवाह की लग्न-पत्रिका लिखवा ही दी। उचित प्रबंध के बिना काम करना।
तेल न फुलेल मँगौरा1 बने।
(1-मसाला मिली हुई मूंग की पीठी की गोल टिकियों को तल कर बनाया गया पकवान।) वस्तुओं के अभाव में कार्यसिद्धि।
तेलिन सें धोबिन का घट ?
तेलिन के पास तिली कूटने के लिए मूसल होता है और धोबिन के पास कपड़े पीटने के लिए मोंगरी, कौन किस बात में कम ?
तेली के बैल कों घरई में पचास कोस की मजल। / तेली के बैल हो गये।
दे. कोतर के बैल। बहुत परिश्रमी हो गये।
तेली के भौत तेल होत तौ का पार चुपरत ?
तेली के बहुत तेल होता है तो क्या पहाड़ चुपड़ता है? कोई अपना पैसा व्यर्थ खर्च नहीं करता।