अक्षर: त
अक्षर 'त' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंतीन पाख दो पानी। जे आई कुटक दे रानी।।
कोदों, समा की तरह कुटकी वर्षा ऋतु में होने वाला एक हलका खाद्यान्न है। अन्य सब अनाजों की अपेक्षा उसकी फसल शीघ्र आ जाती है। वर्षा ऋतु में दो बार पानी बरसा नहीं कि तीन पखवारे में वह कटने योग्य हो जाती है। कहावत में यही कहा गया है।
तीन बराती, नौ पौनया1।
(1-पहुनई करने वाले, मेहमान।) बराती तो केवल तीन, और उनके साथ मुफ्त की रोटियाँ तोड़ने वाले नौ !
तीन में न तेरा में मृदंग बजावें डेरा में।
ऐसा व्यक्ति जो सबसे अलग हो, अथवा जिसे कोई पूछे नहीं। इस कहावत की उत्पत्ति के संबंध में अनेक कथाएं प्रचलित हैं (देखिए 'सरस्वती' जनवरी, 1959 में मेरा लेख) बुन्देलखंड में प्रचलित कथा इस प्रकार है:- एक बार बानपुर के महाराज मर्दनसिंह ने यज्ञ किया। ठाकुरों में बुन्देला, पँवार और धंधेरे ये तीन कुरी वाले श्रेष्ठ माने जाते हैं। इनके अतिरिक्त तेरह कुरी के ठाकुर और होते हैं। उक्त यज्ञ में इन तीन और तेरह कुरी के ठाकुरों को छोड़ कर एक ऐसे सज्जन पधारे जो इन सबसे बाहर थे और एक साधारण कुरी के समझे जाते थे। यज्ञ के भोज में यह समस्या उपस्थित हुई कि अन्य बड़ी कुरी के ठाकुरों के साथ उनको कहाँ और किस प्रकार बिठाया जाय ? बहुत सोच-विचार और जिद्दम-जिद्दा के पश्चात अंत में निश्चय यह हुआ कि उनको डेरे पर ही रखा जाय और वहीं उनके लिए भोजन आदि की व्यवस्था कर दी जाय। ऐसा ही किया गया। तभी से उन सज्जन को लेकर कहावत चल पड़ी कि 'तीन में न तेरह में, मृदंग बजावें डेरा में।
तीन में न तेरा में।
ऐसा व्यक्ति जो किसी गिनती में न हो। कहावत का प्रयोग ऐसे अवसर पर होता है जब किसी आदमी के आने का कोई वक़्त न हो, परन्तु फिर भी बिना पूछे वह बीच में अपनी राय देने के लिए आ जाये।
तीनइ में घंटा चलै, तीनइ में तलवार।/ तीनइ में पैना1 चलै, आलीपुर दरबार।
(1-बैल हाँकने की नुकीली लकड़ी।) आलीपुर राज्य में तीन ही रुपया घंटा बजाने वाले पुजारी को, तीन ही तलवार चलाने वाले सिपाही को और तीन ही हरवाहे को मिलते हैं। ऐसा अंधेर वहाँ है। दे. घर के जान।
तीरथ गये मुड़ायें सिद्ध।
बाहर जाने पर कोई ऐसा काम सामने आ पड़े कि उसे करने का फिर अवसर न मिले तो उसे कर ही डालना चाहिए, भले ही उसमें कुछ खर्च हो।
तुम जाओ अग्गम, तौ हम जेये पच्छम।
तुम जाओ पूर्व, तो हम जायेंगे पच्छिम। तुम जो कहोगे हम ठीक उससे उल्टा करेंगे। किसी की नेक सलाह न मानने पर कहते हैं।
तुम जानों, तुमाओ काम जानें।
जब कोई किसी का कहना न मानें और अपने मन की करें।
तुम डार डार, हम पात पात।
अर्थात हम तुम्हें खूब जानते हैं। तुम थोड़े चालाक हो तो हम तुमसे बढ़ कर हैं।
तुम रिसानी हमें पुसानी।
तुम रूठ गये तो अच्छा ही हुआ, हमें भी तुमसे छुट्टी मिली।
तुमाई मताई ने मुंस करौ, बुरई करी; कई छोड़ दओ, और बुरई करी।
तुम्हारी माँ ने खसम किया, बुरा किया, कहा-छोड़ दिया, और बुरा किया। हर काम सोच-समझ कर ही करना चाहिए। किसी काम को करके पीछे हटना मूर्खता है।
तुमाओ ईमान तुमाये सँगे।
तुम्हारा ईमान तुम्हारे साथ। अर्थात् हम तुम्हारी बात का विश्वास करते हैं। भले ही हम धोखा खा जायें।