अक्षर: त
अक्षर 'त' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंतेली कौ काम तमोली करें, बारा बरस लौं गड़ा में परै।
जो काम जिसके करने का है उसे वही ठीक ढंग से कर सकता है। दूसरा करे तो हानि उठाता है।
तेली रोवे तेल कों, मकसूदन रोवें खरी कों।
सबको अपने स्वार्थ की चिन्ता रहती है। मकसूदन (मधुसूदन) नाम का कोई आदमी तेली के पास तिली पिरवाने के लिए ले गया। परन्तु उसे तेल के साथ खली वापिस नहीं मिली। दूसरी ओर तेली का यह कहना था कि मधुसूदन के पास तेल अधिक पहुंच गया। खली किस बात की लौटायी जाय ? इस तरह अपनी-अपनी जगह दोनों रोते रहे।
तै मोरे घूँघट की राख तौ में तोरी मूँछन की राखों।
तुम मेरी बदनामी न करो तो मैं तुम्हारी बदनामी भी नहीं करूंगी। परस्पर व्यवहार की बात।
तोसा1 सो भरोसा।
(1-तोशा, फा. तोशः, कलेवा, पाथेय।) गाँठ का पैसा वक्त पर काम आता है।