अक्षर: प
अक्षर 'प' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंपैले दिना कौ पाउनो, दूसरे दिना कौ पई, तीसरे दिना रये तौ बेसरम सई।
किसी के घर एक दिन रहने वाला ही पाहुना कहलाता है, दो दिन रहे बह पथिक है और तीन दिन रहने वाले को तो पक्का बेशरम समझना चाहिए।
पैले पारें सब कोऊ जागे, दूजे पारें भोगी। तीजे पारें रोगी जागे, चौथे पारें जोगी।।
रात के पहिले पहर में सब कोई जागते हैं, दूसरे में भोगी, तीसरे में रोगी और चौथे पहर में योगी जागता है।
पैलें मार, पाछे सँमार।
पहिले आगे बढ़ कर दुश्मन पर हाथ जमा देना चाहिए, बाद में अपने को सँभालना चाहिए।
पैलें मुंड कटौवल, फिर धरमराज।
पहिले तो किसी काम के लिए कष्ट भोगना पड़ता है। फल बाद में मिलता है।
पैलें लिख, पाछें दै, भूल परै तौ मोसें लै।
पहिले लिख कर बाद में उधार धन देने से हिसाब में गड़बड़ नहीं पड़ती।
पैलें हँस लो, कै बात कर लो।
पहिले हँस लो, या बात कर लो। दो काम एक साथ नहीं होते।
पैलेई कौर माछी परी।
पहिले कौर में ही मक्खी पड़ी। कार्य के प्रारंभ में ही विघ्न हुआ।
पैलेई चूमा गाल काट खाये।
किसी अवसर से अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए ऐसी हड़बड़ी करना कि सारा काम ही चौपट हो जाय तब।
पैलो गाहक परमेसुर बिरोबर होत।
पहिला ग्राहक परमेश्वर के समान होता है। दूकानदारों का विश्वास।
पैलो मूरख फाँदे कुआ। दूजो मूरख खेलै जुआ। / तीजो मूरख बहिन घर भाई। चौथो मूरख घरे जमाई।।
पहिला मूर्ख तो वह जो कुआं फाँदे, दूसरा वह जो जुआ खेले, तीसरा वह जो अपनी बहिन के घर जाकर रहे, चौथा वह जो ससुराल में रहे।
पैलो सुक्ख निरोगी काया। दूजो सुक्ख होय घर माया। / तीजो सुक्ख पुत्र अधिकारी। चौथो सुक्ख पतिव्रता नारी।।
पहिला सुख शरीर का नीरोग रहना, दूसरा घर में धन-सम्पत्ति का होना, तीसरा योग्य पुत्र का होना और चौथा पतिव्रता स्त्री का पाना है।
पोपाबाई कौ राज।
अंधेरखाता। कहा जाता है कि पोपाबाई गुजरात के एक छोटे प्रदेश की रानी थीं। उनके राज्य में इतना अंधेरखाता था कि वह कुशासन और कुव्यवस्था का प्रतीक बन गया है। और उनके नाम से उपर्युक्त कहावत चल पड़ी है।
पोली1 भरे कोदों, मिरजापुर की हाट।
(1-अनाज नापने का बर्तन जो लगभग आधा सेर का होता है।) छोटे काम का बड़ा आयोजन।
पौ बारा हैं।
लाभ का अवसर मिलना। जीत होना। चौपर के खेल में पौ बारा का दांवे बहुत अच्छा माना जाता है।
पौनी खों बछिया मारी, गौना सुँगाउत फिरे।
पौनी की रक्षा के लिए बछिया को मारा, बाद में उसे सूत का पूरा बंडल सुंघाते फिरे। मामला जब बिलकुल उल्टा हो जाय, सोचा कुछ और हो, हो कुछ और जाय, तब प्रयुक्त।
पौनी सौ पेट, बऊ1 मार गईं जेट।
(1-बूढ़ी स्त्री) पेट तौ पौनी की तरह मुलायम, परन्तु रोटियों का ढेर का ढेर बऊ ने खा लिया !
प्रीत करे कौ जो फल पाओ, अपुन चुके उर हमें थुकाओ।
प्रेम करने का यह फल मिला कि स्वयं भी बदनाम हुए और हमें भी बदनाम कराया।