अक्षर: म
अक्षर 'म' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंमोसें बची तब और ने पाई !
किसी वस्तु को जब कोई बाँट-बाट कर न खाये और स्वयं सब रख ले तब व्यंग्य में।
मौत सें सब हारे। / मौसी कौ घर नइयाँ।
मौसी के घर लाड़-प्यार बहुत होता है। अर्थात जरा सोच-समझ कर काम करो।