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अक्षर: म

अक्षर 'म' से शुरू होने वाली कहावतें

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मोरो छगन-मगन सोने को !

मेरा लड़का सोने का ! अपनी वस्तु का अभिमान करना।

मोसें बची तब और ने पाई !

किसी वस्तु को जब कोई बाँट-बाट कर न खाये और स्वयं सब रख ले तब व्यंग्य में।

मौत सें सब हारे। / मौसी कौ घर नइयाँ।

मौसी के घर लाड़-प्यार बहुत होता है। अर्थात जरा सोच-समझ कर काम करो।