अक्षर: ल
अक्षर 'ल' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंलाख1 सें कोऊ लखेसरी2 नईं बनत।
(1-लाह, एक विशेष प्रकार के कीड़ों द्वारा वृक्षों पर बना एक लाल पदार्थ। 2-लखपती।) साधारण व्यापार करके कोई बड़ा आदमी नहीं बनता।
लातन की देवी बातन नईं मानतीं।
नीच समझाने से नहीं मानता। पीटना ही उसका इलाज है।
लाद देओ, लदाउन देओ, लादनवारो संग दो।
माल लाद दो, लादने की मजदूरी भी दो, और लादने वाला भी साथ दो। एक के बाद एक करके जब कोई आदमी तमाम उचित-अनुचित सुविधाएं माँगता है तब।
लाल बुझक्कड़ बज्झकें और जिन बुज्झो कोय। / पाँवन चक्की बाँद कें हिन्न कुदक गओ होय।।
किसी गाँव में होकर कोई हाथी निकल गया था। इस कारण उसके पैर के चिन्ह जमीन पर बने थे। गाँव वाले उस बड़े गोलाकार चिन्ह को देख कर भयभीत हो गये। अपनी शंका को दूर करने के लिए उन्होंने लाल बुझक्कड़ को बुलाया। लाल बुझक्कड़ ने उस चिन्ह को देख कर बताया कि कोई हिरन अपने पैर में चक्की बांध कर कूदा है।
लाल बुझक्कड़ बुज्झ कें और जिन बुज्झो कोय। / कुआ पुरानो हो गओ सो गुद कड़ आई होय।।
एक बार किसी गाँव के एक कुँए में गेंदे का फूल गिर गया। पनहारी जब पानी भरने गयी तो उस पीली-पीली वस्तु को देख कर बड़ी घबरायी कि यह क्या है। अंत में यह खबर लाल बुझक्कड़ के पास पहुँची। उन्होंने आकर बताया कि कुआँ बहुत पुराना हो गया है। इसलिए यह उसकी गुद निकल आयी है।
लाल बुझक्कड़ बुज्झ के और जिन बुज्झो कोय। / गड्डुमगड्डुा दै करौ सो तन-तन सबकों होय।।
एक बार कहीं बड़ी ज्योनार में भंडार में रखे हुए भात में बिल्ली टट्टी कर गयी। सब लोग बड़ी चिन्ता में पड़े कि क्या किया जाय ? अंत में लाल बुझक्कड़ ने आकर कहा- इसमें इतनी सोचा-विचारी की बात क्या। इसे भात में ही गड्डमगड्ड कर दो। थोड़ा-थोड़ा सबको हो जायगा।
लाल बुझक्कड़ बुज्झ कें और जिन बुज्झो कोय। / हाथ काट कें दो करो तब निरवारो होय।।
एक लड़के ने किसी घड़े में अपने दोनों हाथ डाल दिये और उसमें रखे हुए चने मुठी में लेकर एक साथ निकालने लगा। ऐसा करने में उसके हाथ फँस गये। अब न लड़का मुठी खोले और न उसके हाथ निकलें। तब लाल बुझक्कड़ ने आकर कहा कि इसके हाथ काट कर अलग कर दिये जायें। इसके सिवा विपत्ति से छुटकारा पाने का और कोई उपाय नहीं।
लाल बुझक्कड़ बुज्झ के और न काहू जानी। / पुरानी होकें गिर पड़ी खुदा की सुरमादानी।।
एक बार लाल बुझक्कड़ अपने मित्रों के साथ कहीं जा रहे थे। इतने में उन लोगों को एक कोल्हू खेत में पड़ा दिखायी दिया। उनके साथियों ने पूछा- अरे महाराज, यह क्या है? लाल बुझक्कड़ को उनकी बुद्धि पर बड़ा तरस आया और उन्होंने ऊपर की बात कही।
लालबुझक्कड़ बुज्झकें और जिन बुज्झो कोय। / करी-बड़ंगा टार कें ऊपर ही कों लेव।
किसी गाँव में एक छोटा लड़का अपने दोनों हाथ खंभे के दोनों तरफ फैलाये खड़ा था। उसी समय उसके बाप ने उसके हाथ में थोड़े से चने रख दिये। अब सब कोई इस असमंजस में पड़ गये कि हाथ से चना गिराये बिना लड़का कैसे हाथ बाहर निकालेगा। जब किसी की बुद्धि ने कुछ काम न दिया तब लाल बुझक्कड़ बुलाये गये। उन्होंने आफर सम्मति दी कि ऊपर से कड़ी बड़ंगा हटाकर लड़के को ऊपर ही ऊपर उठा लिया जाय, इससे अंजलि के चने नहीं गिरेंगे, और लड़का भी निकल आयेगा। इसके सिवाय अन्य उपाय नहीं।