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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: ल

अक्षर 'ल' से शुरू होने वाली कहावतें

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लील1 कौ टीका लग गओ।

(1-नीला रंग, नील।) बदनाम हो गये।

लुखरगड़े1 में फँस गये।

(1-लुखरगड़ा, लोमड़ी का बिल जो संकीर्ण और टेढ़ा-मेढ़ा होता है।) अर्थात चक्कर में पड़ गये।

लुगरयाव लँगूरा बिजरी की लौंकन सें डरात।

जलती हुई लकड़ी दिखा कर भयभीत किया गया बंदर बिजली की चमक से डरता है। एक बार कोई कटु अनुभव हो जाने पर आदमी भविष्य में उस विषय में आवश्यकता से अधिक सावधानी बर्तता है।

लुटे के लुटे और लोड़न कुटे।

लुटे भी और पत्थरों से पिटे भी। दोहरी हानि हुई।

लुड़िये सोनों लगबो।

लोढ़ा से सोने का स्पर्श होना। भाग्योदय होना।

लुवा भैय्या ल्याये, पै काम तौ भौजाई अई सें परै।

ससुराल से कोई लड़की मायके आयी है। उससे कहा जा रहा है कि इस भरोसे मत रहना कि तुम्हें भैया लिवा लाये हैं। काम तो नित्य भावज से ही पड़ेगा। जब कोई किसी एक आदमी के बल-बूते पर दूसरे खास आदमी की अवज्ञा करना चाहे तब कहते हैं।

लूगरन भाँवरें पर रईं, नेग कौ टका धरई दो।

दूसरे की विपत्ति की परवाह न करके अपने ही मतलब की बात करना।

लूगरन भाँवरें पर रईं।

लूगरों से भाँवरें पड़ रही हैं। किसी काम में क्षण-क्षण पर विघ्न-बाधाएँ आ रही हों तब।

लूट कौ मूसरई भौत।

मुफ्त में जो मिला वही अच्छा।

लैंड़ा1 हाथी घर (अ) ई की फौज मारत।

(1-कायर, निकम्मा।) कायर आदमी घर का ही सत्यानाश करता है।

लैन गईं परचन1, कुत्ता पींड़ उठा लै गओ।

(1-वह सूखा आटा जिसे रोटी बेलने के समय लोई पर लपेटते हैं। 2-गुँदे हुए आटे की पिंडी।) एक काम करने गये तब तक दूसरा चौपट हो गया।

लैन गईं पूत, दै आईं भतार।

लाभ के लिए काम किया, उल्टी हानि हो गयी।

लैन गई सीदो, उल्टो आन बीदो।

किसी ब्राह्मण की स्त्री सीधा लेने गयी, परन्तु इस प्रकार की विपत्ति में पड़ गयी कि उल्टा उसे ही सीधा देना पड़ा। लेने के देने पड़ जाना।

लैना एक न देना दो।

न किसी का एक लेना है, न दो देना है। किसी से कोई प्रयोजन नहीं।

लैनो करकें दैनों करिये, मरत न होओ तौ ऊँसई मरिये।

ऋण लेकर किसी को ऋण दिया जाय तो यह बेमौत मरना है।

लोग कौ मुंस1 कड़ुआ।

(1-पति, स्वामी।) स्त्री जिस प्रकार अपने पति के वश में रहती है उसी प्रकार मनुष्य यदि किसी के वश में रहता है तो वह ऋण है।

लोग चले मोय हूमस1 लागी।

(1-उमंग, इच्छा, कामना।) देखा-देखी काम करना। लोग कहीं जा रहे हैं तो उनके साथ जाने की हमें भी इच्छा।

लोबान जरो और मुरदा चेते।

स्वार्थ की बात सुन कर आदमी सजग हो जाता है।