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अक्षर: ल

अक्षर 'ल' से शुरू होने वाली कहावतें

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लोभी कौ धन लाबर खाय।

लोभी का धन लफंगे झूठे खाते हैं।

लोभी गुरू, लालची चेला, दोऊ नरक में ठेलमठेला।

चाहे गुरू हों या चेला, लोभ करने से दोनों नरक में जाते हैं।

लौटौ बराती और गुजरो गवाई। (जे फिर नईं पूँछे जात)।

लौटा बराती और अदालत में गवाही देकर आया हुआ आदमी इन्हें फिर कोई नहीं पूछता।