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अक्षर: स

अक्षर 'स' से शुरू होने वाली कहावतें

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सौ सयाने एक मता।

सब सयानों की एक ही राय होती है।

सौ सुनार की, एक लुहार की।

सुनार की सौ चोट लुहार की एक चोट के बराबर होती है। जबर्दस्त की एक चोट ही भयंकर समझनी चाहिए।

सौ सौ जूता खायें तमासो घुसकें देखें।

लड़ाई झगड़ों की परवा न करके जबर्दस्ती तमाशा देखने वालों पर व्यंग्य।

सौकीन गुंडा रेंट1 कौ अतर।

(1- नाक का मैल।) बेमेल सजधज के लिए।

सौत चून की बुरई होत।

सौत आटे की भी बुरी होती है।