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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: स

अक्षर 'स' से शुरू होने वाली कहावतें

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सोनों जानिये कसें। मानुस जानिये बसें।

सोने की कसौटी पर कसने से और मनुष्य की पास बसने से परीक्षा होती है।

सोनों बिगरो सुनार घर। बिटिया बिगरी बाप घर।।

सोना सुनार के घर जाने से बिगड़ जाता है। (वह उसमें खोट मिलाये बिना नहीं रहता।) उसी प्रकार लड़की भी बाप के घर रहने से बिगड़ती है। क्योंकि मायके में उस पर विशेष नियंत्रण नहीं रह पाता।

सोम, सुक्र, सुरगुरु की जोय, पुहुमी फूल फलंती होय।

सोम, शुक्र और बृहस्पतिवार के दिन जन्म लेनेवाली स्त्री पृथिवी पर खूब फलती-फूलती है।

सोरयें सयान, बीसें ज्ञान, पचीसें भान।

सोलह वर्ष में लड़का सयाना हो जाता है, बीस में उसे बोध होता है, और पच्ची-सर्वे में संसार का अनुभव होने लगता है।

सोरा सै के करे हजार। / (घी की आँख करौ रुजगार।

घर का ही कोई लड़का अपनी अनुभवहीनता के कारण व्यापार में हानि उठा जाय अथवा कोई और काम चौपट कर दे तब कहते हैं।

सौ के साठ करबो।

नासमझी के कारण व्यापार में हानि उठाना। काम बिगाड़ देना।

सौ गुंडा एक मुछमुंडा।

एक मुछ मुंडा सौ गुंडों के बराबर होता है।

सौ जनन में परखा लो।

अर्थात हमारी चीज खरी है। चाहे जिसे दिखा लो।

सौ डंड एक लिपटंत।

सौ डंड कुश्ती की एक लिपटंत के बराबर होते हैं। अर्थात डंड से कुश्ती अच्छी होती है।

सौ डंडी एक बुन्देलखंडी।

सौ डंडेवालों अथवा कसरती जवानों की बराबरी एक बुन्देलखंडी करता है। इसमें किसी ने यह पंक्ति भी जोड़ रखी है- सौ बघेलखंडी एक बुन्देलखंडी।

सौ बक्का, एक लिक्खा।

सौ बकवादी एक लिखने वाले के बराबर होते हैं।

सौ बातन की बात।

अर्थात सारांश की बात।

सौ बेर चोर की एक बेर साव की।

चालाक आदमी कई बार अपराध करके भले ही बच जाय, परन्तु कभी-न-कभी पकड़ा ही जाता है और अपनी चालाकी का दंड पाता है।

सौ में सती, लाख में जती।

सैकड़ों स्त्रियों में एक सती होती है, और लाखों पुरुषों में एक यती।

सौ लठेंत, एक पटेंत।

सौ लाठीवालों को एक पटेबाज हरा देता है।

सौ ल्यावे राँड़ी, एक न ल्यावे छाँड़ी।

चाहे सौ विधवा भले ही रख ले, परन्तु किसी की छोड़ी हुई स्त्री कभी न रखे।