अक्षर: ह
अक्षर 'ह' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंहोती के तीन नाम, परसू, परसा, परसराम।
मनुष्य जिस हैसियत का होता है उसी के अनुसार उसकी इज्जत होने लगती है।
होते कौ बाप, अनहोते की माँ।
सम्पत्ति में पिता और विपत्ति में माँ काम आती है।
ह्वै है वही जो राम रचि राखा को करि तर्क बढ़ावहिं साखा। - तुलसी
भाग्य ही प्रतिफलति होता है।