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अक्षर: ह

अक्षर 'ह' से शुरू होने वाली कहावतें

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होती के तीन नाम, परसू, परसा, परसराम।

मनुष्य जिस हैसियत का होता है उसी के अनुसार उसकी इज्जत होने लगती है।

होते कौ बाप, अनहोते की माँ।

सम्पत्ति में पिता और विपत्ति में माँ काम आती है।

होते निपुन न होते फूहर।

यदि निपुण होते तो मूर्ख की उपाधि न मिलती।

होनहार विरबान के होत चोकने पात।

होनहार के लक्षण पहिले से ही दीख पड़ते हैं।

होनहार होकें रत।

जो होना होता है वह टलता नहीं।

होवे बाके भाग सों भली कतन का जाय।

कोरी सहानुभूति वालों पर व्यंग्य।