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अक्षर: च

अक्षर 'च' से शुरू होने वाली कहावतें

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चल न पावें, कूँदन1 नाँव।

(1-कूदने वाले।) चल तो पाते नहीं, नाम है कूदन। गुण के विपरीत नाम।

चलत बैल खों अरई1 गुच्चत।

(1-बैल हाँकने की लकड़ी जिसमें एक नुकीली कील और चमड़े की बधियाँ लगी रहती हैं।) काम करते हुए आदमी को छेड़ते हैं।

चलती के पौ बारा।

प्रभावशाली आदमी अपने हर काम में सफल होता है।

चलती कौ नाव गाड़ी।

गाड़ी जब तक चलती है तभी तक गाड़ी है, अन्यथा काठ-कबाड़ का ढेर है। ऐसे आदमी के लिए प्रयुक्त जिसकी बात लोग मानते हों अथवा जिसके हर काम आसानी से होते हों।

चलती गाड़ी में औंगन सब कोऊ देत।

लाभ की आशा से ही खर्च किया जाता है।

चलती रोजी पे लात मारत।

मूर्खतावश बँधी-बँधायी नौकरी छोड़ते हैं।

चलतो घोड़ो आप दानों माँग लेत।

काम करने वाले को स्वयं पैसा मिलता है।

चलनी में दूद दोयें, कपारै खोर देयँ।

चलनी में दूध दुहते हैं, और दोष देते हैं भाग्य को !

चलीं चलीं बिजमक्खो आईं।

इधर-उधर की झूठी खबर फैलाने अथवा गप्प हाँकने वाले के लिए प्रयुक्त।

चलै बहुत सो बीर न होई।

बहुत परिश्रम करने वाला बहादुर नहीं माना जाता। उसके परिश्रम में कुछ सार भी होना चाहिए।

चलौ जान दो ढला-चला।

जिस तरह लस्टम-पस्टम काम चल रहा है उसी प्रकार चलने दो; बोलो मत।

चलौनयाऊ1 हो रईं।

(1-गौने में आई हुई नववधू।) बहुत सजी-धजी स्त्री के लिए।

चाकर खों ठाकुर भौत, ठाकुर खों चाकर भौत।

नौकर को मालिकों की कमी नहीं रहती और न मालिक को नौकरों की।

चाँदी कटबो।

चाँदी कटना। किसी काम में खूब मुनाफा होना।

चाँदी कौ जूता मारबो।

पैसा खर्च करके काम बनाना।

चामें तेल, गुलामे रोटी।

तेल लगाने से जिस तरह चमड़ा मजबूत रहता है, उसी तरह भर पेट खाना खिलाने से नौकर भी ठीक काम करता है।