अक्षर: न
अक्षर 'न' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंन अँदरा न्योतो, न दो बुलाओ।
अंधे को न्योतने पर एक आदमी उसका हाथ पकड़ कर साथ लाने वाला चाहिए। ऐसा काम क्यों करो जिसमें व्यर्थ संकोच में पड़ना पड़े।
न उनको ठौर, न उनको और।
जब दो आदमी एक-दूसरे से अपना पिड छुड़ाना चाहते हों, परन्तु एक-दूसरे के बिना उनका काम भी न चलता हो।
न तर घँगरिया, न ऊपर फरिया।
ऐसी स्त्री जिसके पास पहिनने-ओढ़ने को न हो। निर्लज्ज या फूहड़ के लिए भी कह सकते हैं।
न तें मोरी कये खीस निपोरी। न मैं तोरी कओं दाँत निपोरी।।
न तू मेरी बदनामी कर और न मैं तेरी करूँ। परस्पर व्यवहार की बात।
न नौ मन तेल हुइये, न राधा नाचें।
न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेंगी। अयोग्यता छिपाने के लिए ऐसी शर्त पर काम करने को कहना जो संभव न हो।
न फूँक लैने, न फटक दैनें।
न हमें (अनाज) फूँक कर लेना है, और न फटक कर देना है। हमें ऐसा लेन-देन नहीं करना जिसमें सरासर घाटा है।
न ब्याये, न बराते गये।
न तो विवाह किया और न किसी की बारात में ही गये। अनुभवहीन व्यक्ति।
न माँड़ पसाउत के, न माँड़े1 पऊत के।
(1-मिट्टी के तवे पर सिकी हुई मैदा की पतली रोटियाँ, जो आग पर नहीं सिकती।) किसी योग्य नहीं।
न माँयन के, न मड़वा तर के।
न तो माँयना लेने वालों में और न मँड़वा के नीचे बैठने वालों में ही। विवाह में माईहर, मेंहर, मातृदेवी की पूजा के लिए जो अलग रोटियाँ, पूड़ियाँ या गुलेरियाँ तैयार करके रखी जाती हैं वे माँय कहलाती हैं। ये कुटुम्ब वालों को ही प्रसाद के रूप में खाने को दी जाती है। कुटुम्ब से बाहर के लोगों को नहीं मिलतीं और न वे उस स्थान में ही जाने पाते हैं जहाँ माँय रखी रहती हैं। इसी प्रकार कुछ विशेष सगे-संबंधियों को ही विवाह में मंडप के नीचे बैठ कर भोजन करने का अधिकार होता है, दूसरे लोग नहीं बैठने पाते। अतः जिसकी कोई वकत न हो ऐसे आदमी के लिए कहावत का प्रयोग होता है।
न रय बाँस, न बजे बाँसुरी।
जिस वस्तु के रहने से हानि होती हो उसे जड़ से नष्ट कर देना।
न राँड़ कओ, न निभूती सुनो।
न किसी से बुरी बात कहो, और न उससे अधिक बुरी सुनो।
न लरका दिया कै (ये) न सोनो हुइये।
किसी ऐसी शर्त के कारण जो पूर्ण न हो सकती हो, काम का अटक जाना। (लोगों में विश्वास प्रचलित है कि छः महीने का दूध पीता बालक यदि मुँह से 'दिया' कह दे तो मिट्टी का दीपक सोने का हो जाता है।)
नई दुकान, तिबरसी गुर माँगें।
नई दुकान और तीन वर्ष का पुराना गुड़ माँगते हैं, जो कहाँ रखा ?