अक्षर: न
अक्षर 'न' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंनन्ने-बड़े करत क्वाँरे रै गये।
पहिले उम्र में छोटे होने के कारण विवाह नहीं हो सका, फिर बड़े होने से नहीं हो सका, इस प्रकार छोटे-बड़े करते ही क्वाँरे रह गये ! बातों-बातों में ही समय बीत गया, और अभीष्ट पूरा नहीं हो सका।
नन्नों भूत बड़े कों दबकावे।
छोटा भूत यदि बड़े को डाट-डपट बताये तो यह एक आश्चर्य की ही बात है।
नमो नारायन, तौ कई बच्चा आज, भोजन तोरेई घरे।
किसी साधू बाबा से किसी ने रास्ते चलते प्रणाम किया, तो उसने उत्तर दिया - अच्छा, बेटा आज भोजन तेरे ही घर। जबर्दस्ती की मुसीबत गले पड़ना।
नये गुंडा अंडी कौ फुलेल।
जब कोई नौसिखिया कोई अनोखी या अनुपयुक्त वस्तु काम में लाये तब।
नर जाने दिन जात है, दिन जाने नर जाय।
मनुष्य समनता है कि दिन जा रहा है, परन्तु दिन के लेखे तो मनुष्य ही जाता है।
नरदवा की बिनती कों गये, बखरी हार आये।
नाबदान की प्रार्थना लेकर गये कि यह हमारा है, हमें दिलवा दिया जाय, परन्तु उल्टे घर हार कर आ गये।
नरियाँ झुरियाँ कड़ जैहें, निमान कौ पानी निमाने रैहै।
छोटे नदी-नाले तो वह कर निकल जायेंगे, परन्तु धरती के नीचे का पानी नीचे ही रहेगा। ओछी प्रकृति के ऐसे आदमी जो बहुत इतरा कर चलते हैं नष्ट हो जाते हैं, परन्तु गंभीर पुरुष अपनी जगह पर टिके रहते हैं।
ना दैवे की सौ बातें।
किसी को जब कोई वस्तु नहीं देना, हो तो उसके लिए सौ बहाने बनाये जा सकते हैं।
ना बात बिरानी कैये, ना ऐंचातानी सैये।
न व्यर्थ दूसरे की बात किसी से कहो और न इंचे-खिचे फिरो। किसी के झगड़े में पड़ना ठीक नहीं।
नाऊ के बार आँगें आऊत।
जब कोई ऐसी बात के विषय में पूछे जिसका वृत्तान्त तुरंत ही ज्ञात होने वाला हो तब।
नाऊ नाऊ की बरात, टिपारौं1 को लै चलै ?
(1-मुकुट की आकार की छोटी टोपी। बुन्देलखंड में यह शब्द बाँस की वनी ढक्कनदार टोकनी के अर्थ में प्रयुक्त होता है।)