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अक्षर: न

अक्षर 'न' से शुरू होने वाली कहावतें

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नई नाउन बाँस की नहन्‍नी।

किसी नौसिखिया के अनोखे ढंग से काम करने पर।

नई बऊ कौ आला गावो।

किसी नई वस्तु की बार-बार प्रशंसा करना।

नई बऊ, कुजाँगा खाता।

नयी बहू और कुठौर में फोड़ा। असमंजस का विषय।

नई बात नौ दिना।

किसी नयी बात की चर्चा चार-पाँच दिन ही रहती है। तत्पश्चात् वह पुरानी पड़ जाती है।

नओं नौ बिना, पुरानो सब दिना।

नयी वस्तु दो-चार दिन में ही पुरानी पड़ जाती है, उसके पश्चात उस पुरानी वस्तु से ही काम पड़ता है। इसलिए नयी के आगे किसी पुरानी चीज का तिरस्कार ठीक नहीं।

नकटा ससुर, निर्लज्ज बऊ, आ रे ससुरा कानियाँ1 कऊँ !

(1-कहानी, किस्सा।) ऐसे घर के लिए कहते हैं जहाँ सभी बहुत निर्लज्ज हों।

नकल में अकल कौ का काम।

नकल के लिए बुद्धि की आवश्यकता नहीं होती।

नंग बड़े परमेसुर तें।

नंगे से ईश्वर भी डरता है, क्योंकि उसका कोई क्या बिगाड़ लेगा ?

नगन नगन कोड चुअे।

किसी का बुरा चाहना। शाप देना।

नगर बसंते देवा नाम, गाँव बसंते भूता नाम।

नगर में देवता बसते हैं और गाँव में भूत। अर्थात गाँव का रहना अच्छा नहीं।

नंगा के संगै नचे बिना हींसा नईं मिलत।

नंगे के साथ नाचे बिना हिस्सा नहीं मिलता। जैसे साथ तैसा ही बनने से काम चलता है।

नंगा ठाँड़ो गैल में चोर बलैयाँ लेय।

जिसके पास कुछ है ही नहीं, उससे कोई लेगा क्या?

नंगा सो चंगा।

जिसके पास कुछ नहीं वह सदैव मजे में है।

नंगी का सपरे और का निचोरे ?

जिसके पास कोई वस्तु है ही नहीं वह क्या तो स्वयं उसका उपयोग करें, और क्या दूसरों को दे?

नंगी नचत।

नंगी नचती है। निर्लज्ज स्त्री के लिए।