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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: ल

अक्षर 'ल' से शुरू होने वाली कहावतें

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लकरी बेंचत लाखन देखे, घास खोदतन धनबनरा। / अमर हते ते मरतन देखे, तुमई भले मोरे ठनठनरा।।

किसी स्त्री का अपने मूर्ख पति के प्रति कथन। यह पाली नाम-सिद्धि जातक है। बुन्देली में इसकी कथा इस प्रकार है- एक स्त्री के पति का नाम था ठनठनरा। उसको यह नाम पसंद नहीं था। वह पति के लिए कोई अच्छा नाम बूढ़ने के लिए निकली। एक व्यक्ति लकड़ियों का बोझ लिए जा रहा था। उसका नाम था लाखन। दूसरा घास खोद रहा था। उसका नाम था धन-धनरा। एक व्यक्ति मर गया था और उसकी अरथी जा रही थी, उसका नाम था अमर। स्त्री ने यह सब देख-सुन कर मन में सोचा कि नाम से कुछ आता-जाता नहीं, मेरे पत्नि का जो नाम है वही अच्छा और उसने ऊपर की गाथा कही।

लंका कों सोनों बताबो।

लंका को सोना बताना। जहाँ जो वस्तु पहिले से प्रचुर मात्रा में मौजूद है वहाँ उसे ले जाने की हास्यजनक चेष्टा करना।

लंका में सब बावन गज के।

छोटे भी जहाँ बड़ों के कान काटें।

लकीर के फकौर।

पुरानी ही चाल पर चलने वाले।

लग गओ तौ तीर नई तौ तुक्का।

काम करने पर कुछ न कुछ तो होगा ही।

लगी बुरई होत।

मन में कोई बात चुभ जाने पर चैन नहीं पड़ता।

लगै न बिलगै रँग चोखो आवे।

मुफ्त में ही काम बनाने का प्रयत्न करना।

लगै बई कौ नाव ओखद।

जिससे रोग अच्छा हो वही दवा।

लँगोटी में फाग खेलबो।

थोड़ा खर्च करके अपना काम बना लेना। फाग केवल लँगोटी में नहीं खेली जाती। उसमें तो अच्छे कपड़े पहिने जाते हैं।

लटे-पटे दिन काटिये।

बुरे दिन भी जैसे बने काटना चाहिए।

लटो हाथी लाख कौ।

बड़ा आदमी बिगड़ने पर भी अपना मूल्य रखता है।

लड़इयन में गोली खोबो।

गीदड़ों में गोली खोना। किसी पर व्यर्थ पैसा खर्च करना।

लड़कदंदोर में परबो।

लड़कों के साथ मिल कर लड़कपन करना।

लड़ुआ ढँड़क रये।

लड्डू, लुढ़क रहे हैं। अर्थात बड़े प्रेम की बातें हो रही हैं।