बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का डिजिटल संग्रह
बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: द

अक्षर 'द' से शुरू होने वाली कहावतें

arrow_back वापस जाएं

दूदन अनाओं, पूतन फलो।

धन और संतान की वृद्धि हो। बढ़ी-बूढ़ी स्त्रियों का सधवाओं को आशीर्वाद।

दूबरी और दो असाड़, चरन गईं दूर हार।

गाय एक तो दुबली, फिर एक की जगह दो असाढ़ होने से पानी का अधिक बरसना, उस पर भी जंगल में दूर चरने के लिए जाना। तात्पर्य यह कि इस प्रकार विपत्ति पर विपत्ति कोई कहाँ तक भुगत सकता है ?

दूबरे ढोर कों बगई1 भौत लगतीं।

(1-मच्छर की तरह का एक छोटा जीव जो ढोरों के शरीर से चिपककर उनका रक्त चूसा करता है।) कमजोर को ही सब रोग घेरते हैं। मरे को मारें साह मदार।

दूला के संगे बरात सजत।

दूल्हा की तैय्यारी के साथ ही बरात की तैय्यारी होती है।

देओ दार में पानी।

किसी बड़ी पंगत में भोजन की सामग्री कम हो जाने पर विनोद में।

देख देख कौ चद्दर खूँट। कौन करौंटा बैठे ऊँट।।

न जाने क्या फैसला हो। दो आदमियों में जब झगड़ा हो और लोग यह जानने को उत्सुक हों कि वह किस प्रकार तै होता है तब कहते हैं।

देखत को धन1 नोंनी2। राँटा करें न पौनी।।

(1-बहू या बेटी के लिए प्रेम का संबोधन। 2-अच्छी।) घर के काम में सुस्त बहू या बेटी के लिए।

देखत माछी नईं खाई जात !

जान-बूझ कर कोई बुरा काम नहीं किया जाता।

देखादेख परोसन की।

पास-पड़ौस के लोगों के कहने में आकर जब कोई काम करे।

देखी अनदेखी भई।

आँखों से देखी बात भी झूठी पड़ गयी !

देखी तोरी कालपी, बाबन पुरा उजार।

कोरा नाम ही नाम, सार कुछ नहीं। (अकबर के जमाने में कालपी एक समृद्ध बस्ती थी। परन्तु अब उजड़ी पड़ी है। चारों ओर खंडहर ही खंडहर नजर आते हैं।)

देखे सें भूँक भगत।

देखने से भूख भगती है। किसी अत्यन्त सुन्दर (स्‍वादिष्‍ट) वस्तु के लिए कहते हैं।

देखो री आँखें, सुनो रे कान !

कोई बहुत अनहोनी बात सामने आने पर।

देरी नाँके कौ पाप लगौ।

घर आने का पाप लगा। भलाई करते बुराई हाथ आयी।

देरी हरी बनी रये !

घर हरा-भरा बना रहे। (आशीर्वाद)

देवतन चढ़ी सुहारी1। कूकुर खायँ चाय बिलारी।।

(1-पूड़ी।) जो वस्तु घर से बाहर निकल गयी और दूसरों को दी जा चुकी, उसकी चिन्ता क्या ?