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अक्षर: न

अक्षर 'न' से शुरू होने वाली कहावतें

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नाक कटी सो कटी, पै घी तौ चाटौ।

किसी ने कनस्टर में मुँह डाल कर घी चाटा, जिससे उसकी नाक कट गयी। तब उसने कहा, नाक कट गयो तो कोई चिन्ता नहीं, घी तो चाटने को मिला। बेशरम के लिए प्रयुक्त।

नाक काट पटोरन पोंछत।

नाक काट कर रेशमी रूमाल से पोंछते हैं। हानि पहुँचा कर सहानुभूति दिखाना।

नाक चना बिनवाबो।

किसी को खूब तंग करना। हैरान करना।

नाक छिदाउन गई, कान छिदा कें आ गईं।

गये किसी कार्य के लिए, कोई दूसरा कार्य करके आ गये।

नाक दूर, के हँसिया।

कोई आदमी जब किसी काम को करना चाहे और उसके साधन पहिले से मौजूद हों तब कहते हैं कि कौन मना करता है, कर डालिए ऐसा काम।

नाक न बाँसो1, देखें लोग तमासो।

(1-नाक की ऊपर की हड्डी, बाँसा।) बेशरम के लिए कहते हैं।

नाक नकटी, मों फिकार1।

(1-काले रंग का, कोदों, समा की तरह का, एक हलका खाद्यान्न।) निर्लज्ज और कुरूप स्त्री के लिए कहते हैं। गाली के रूप में भी प्रयुक्त।

नाक नंगी, गर हमेल1।

(1-गले में पहिनने की सिक्कों की माला।) जब किसी स्त्री के पास नित्य- प्रति के पहिनने के साधारण वस्त्राभूषणों की तो कमी हो, परन्तु जो दो एक कीमती गहने या कपड़े उसके पास हों उनको पहिन कर ही लोगों को दिखाती फिरे तब व्यंग्य और ताच्छत्य में उसके लिए प्रयोग करते हैं।

नाक पै माछी नई बैठन देत।

नाक पर मक्खी नहीं बैठने देता। ऐसा आदमी जो किसी का एहसान लेना पसंद न करे।

नाक सें अफरे बैठे।

किसी वस्तु की इच्छा नहीं। खूब तृप्त हैं। ऊबे बैठे हैं। व्यंग्य में।

नागाजी कूच, निउरे तौ अतीत झूठ।

नागा साधुओं के दल में किसी ने कहा- चलिए बाबा जी, कूच, तो उत्तर मिला- मैं तो पहिले से तैयार खड़ा हूँ। कमर झुकाऊँ तो कहना साधू झूठा था। किसी काम के करने के संबंध में इस प्रकार का विश्वास दिलाने के लिए कहते हैं कि मैं तो तैयार हूँ। मेरी ओर से बेफिक्र रहो।

नाच न आवे आँगन टेढ़ो।

मूर्ख कारीगर साधनों को दोष देता है। किसी काम को करने का तो ढंग मालूम न हो और साज-सामान को बुरा बताये।

नाच परौसिन मोरें, तौ में ठाँड़ी नाचों तोरें।

तू मेरे ऊपर थोड़ा एहसान करे, तो मैं बहुत करने को तैयार हूँ। परस्पर व्यवहार की बात।

नाठ कौ धन।

निपूते का घन। (किसी को फलता नहीं)

नाती माँग पूत मिलत।

किसी से बहुत माँगो तब थोड़ा मिलता है।

नाथ1 पर्यया2 मोरे हात। बच्छा कूँदै नौ नौ हात।।

(1-बैल, भैस आदि की नाक छेद कर उन्हें वश में करने के लिए डाली जाने वाली डोरी। 2-ढोर बाँधने की छोटी रस्सी, पगहा।)

नान सबके गोड़े धोउत, अपने धोउत लजावे।

नाइन सबके पैर घोती है, परन्तु अपने पैर धोने में लजाती है। अपने हाथ से अपना काम करने में लोगों को प्रायः संकोच होता है।

नान सें पेट नईं छिपत।

किसी ऐसे मनुष्य से कोई बात नहीं छिपायी जा सकती जिसका वह सब भेद जानता हो।

नामी चोर मारो जाय। नामी साव कमा खाय।।

ख्याति से कहीं हानि और कहीं लाभ होता है।