अक्षर: ब
अक्षर 'ब' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंबड़न की बात बड़े पहचाना।
बड़ों की बात बड़े ही समझ सकते हैं। बड़े ही बड़ों की कद्र कर सकते हैं।
बड़न की सोंज खेती करी। भुस बाँटतन अबेरा परी।।
बड़े आदमियों के साझे में कोई काम नहीं करना चाहिए। झगड़ा होने पर उनसे कुछ कहा नहीं जा सकता और अंत में अपने को ही हानि उठानी पड़ती है।
बड़न के जितनी आमदनी उतनो खर्च।
बड़ी गाय वाले लोगों का व्यय भी बहुत होता है।
बड़न कौ बड़ो पेट।
जो जितना बड़ा होता है उसे पैसे की उतनी ही चाह रहती है। अथवा दूसरों के पैसे को वे उतनी ही आसानी से हजम भी कर जाते हैं।
बड़ी बऊ ने जो करौ, फरा1 पै घी फरौ।
(1- आटे की पानी में सिंकी हुई टिकियाँ या पूरियाँ।) बड़ी काकी ने मन किया तो फरा पर घी रखा। झूठा आदर-सत्कार।
बड़ी बऊ, बड़ौ भाग।
दूल्हे से दुलहिन बड़ी हो तो यह सौभाग्य की बात है। अथवा बड़े आदमियों का भाग्य भी बड़ा होता है।
बड़ी बड़ी तिथें, फुटकनू हरछट।1
(1-हलषष्ठी-वत जो भादों में कृष्ण पक्ष में होता है। इस दिन हल का जुता-बोया अन्न नहीं खाया जाता। पूजा के लिए भाड़ में चने आदि भुनवाये जाते हैं। इसी से इसे फुटकन् हरछट कहते हैं।) बड़ी-बड़ी तिथियों के सामने हरछट की क्या बिसात ? किसी बड़ी बात के सामने छोटी की क्या गिनती ?
बड़ी मुतोरू लंबे कान। हर देखे सें तजें प्रान।।
ऐसा बैल जिसकी मूत्र-स्थली बड़ी और कान लंबे हों, खेती के काम का नहीं होता।
बड़े नाव की बड़ी बिपदा।
जो आदमी जितना प्रसिद्ध होता है उसे इधर-उधर की उतनी ही विपत्तियाँ घेरे रहती हैं।
बड़े बड़े साँप सँपेरन मारे, बिच्छन दे तुम कन् से आई ?
सँपेरों ने बड़े-बड़े साँप तो मार डाले, बिच्छनदेवी तुम कहाँ से आयी ? किसी काम में विघ्न डालने वाले या जबर्दस्ती बीच में बोलने वाले उपद्रवी के लिए।
बड़े भये तो का भये, जैसें पेड़ खजूर। / छायें न बिलमें दो जने फल लागें अति दूर।। / बड़े भये तो का भये, परे रये फैल में।
बड़े होने से क्या हुआ, यदि जीवन बुरे कर्मों में बिताया। जैसे खजूर का पेड़ न तो छाया देता है फल भी बहुत ऊँचाई पर लगते हैं।
बड़े भाग से होत है, दाद, खाज उर राज।
दाद और खाज के खुजलाने से बड़ा कष्ट होता है, और एक विशेष प्रकार का आनंद भी मिलता है। इसलिए इनके रोगी के लिए व्यंग्य में प्रयोग करते हैं।