अक्षर: ब
अक्षर 'ब' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंबड़े सपूत करौ रूजगार। सोरा सै के करे हजार।।
लड़के की अनुभवहीनता से किसी काम में नुकसान हो जाने पर।
बड़े-बड़े तौ बये जायें, गाड़र थाय लेय।
बड़े-बड़े जिस काम को न कर सकें उसे एक तुच्छ आदमी करने का साहस करे।
बड़ौ लाड़ मोरी मौसी करें, छिनक छिनक दोऊ कौरे भरें।
मेरी मौसी ने बड़ा लाड़-प्यार किया, तो छिनक-छिनक कर घर के दोनों कोनें भर दिये। झूठा प्रेम करने पर।
बँदरा बैला जेठो पूत, जौ बिर्रे कौ कड़े सपूत।
भूरे रंग का बैल और जेठा लड़का जिस किसी का ही अच्छा निकलता है।
बँदी मुठी लाख की, खुले पाछें खाक की।
सारे रहस्यों का उद्घाटन अनुचित होता है।
बँदी मुठी लाख की।
जब तक किसी के घर की असलियत लोगों पर प्रकट नहीं होती तब तक वह बड़ा आदमी ही माना जाता है।
बन के जाये, बनई में नईं रत।
वन में पैदा हुए वन में ही नहीं रहते। आदमी के दिन सदा एक से नहीं रहते।
बनी को बनावे सो बानियाँ।
बने हुए काम को और अधिक अच्छा बना कर दिखाये वही सच्चा वैश्य है।
बनी न बिगारे तो हम काय के।
जानबूझ कर उपद्रव करने वाले के लिए व्यंग्य में।
बनें तो कोऊ के होकें रइये, नई तौ कोऊ कों करके रइये।
हो सके तो किसी के प्रेमी बन कर रहिए, या फिर किसी को अपना प्रेमी बना कर रखिए।