अक्षर: ब
अक्षर 'ब' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंबा (अ) र की एक सें घर की आदी साजी।
बाहर की एक से घर की आधी (रोटी) अच्छी। भूखा भले ही रहे परन्तु किसी का एहसान लेकर खाना ठीक नहीं।
बा (अ) र के खायें, घर के गीत गायें।
बाहर के लोगों पर व्यर्थ पैसा खर्च किया जाय और घर में तंगी हो।
बाई के बेर अड़ाई सेर।
(1-बहिन-बेटी के लिए संबोधन) किसी वस्तु का उचित मूल्य न आँकना।
बाई तौ खालें तब बायनों देयँ।
स्वयं खाने को है नहीं दूसरों को क्या खिलायेंगे ?
बाँझ ब्यानो सोंठ उड़ानो।
बाँझ के बच्चा हुआ तो उसने मनमानी सोंठ खायी। जीवन में पहिली बार किसी को कोई काम करने का अवसर मिले तो वह उसका बहुत प्रदर्शन करता है।
बाँड़ी उजारै जैहे? कई में तो पूँछई उठायें।
बंडी से किसी ने कहा- चल दूसरों का खेत उजाड़ करने चलती है? कहा- मैं तो पहिले से ही पूँछ उठाये हुए हूँ। उपद्रवी आदमी के लिए कहते हैं।
बाँड़ी1 कये --में पूंछ उनारों।
(1-ऐसी गाय या भैंस जिसके पूंछ न हो।) बंडी कहती है कि मैं पूंछ उठाऊँ। तुच्छ व्यक्ति काम करने का हौसला करे तब।
बाढ़ै पूत पिता के धर्मा, खेती उपजे अपने कर्मा।
पिता के शुभ कर्मों से पुत्र समृद्धिशाली बन सकता है, परन्तु खेती में सफल होने के लिए स्वयं उद्योग करना पड़ता है।
बात छीलें रूखी, काठ छीलें चीकनी।
बात छीलने से अर्थात गयी गुजरी बात को लेकर बहस करने से तो रूखी और काठ छीलने से चिकना होता है।
बात बात में भाँत है और भाँत भाँत की बात। / बातन हाती पाइये बातन हाती लात।।/ बादर देखें पोतला1 नईं फोरो जात।
(1) बातें अच्छी बुरी दोनों होती हैं। अच्छी बात, व्यवहार करने पर हाथी जैसी बड़ी वस्तु प्राप्त हो जाती है और बुरी बात या व्यवहार का परिणाम बुरा होता है।
(1-मिट्टी का छोटे मुँह का चपटा बर्तन।)
बाँध के मारे, कत भौत सऊत है।
बाँध कर पीट रहे हैं। कहते हैं - बहुत सहनशील है।