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बुंदेलखंड विश्वकोश

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अटेरबौ [aTerabau]

क्रि.स.
तकुए पर से उतारकर लच्छी या गुण्डी बनाने के लिए एक विशेष आकार के पटिये पर लपेटना.

अटौरी [aTaurI]

सं.स्त्री.
बाँस का बना हुआ उथला और चौड़ा पात्र जिसकी तली दुहरी होती है.

अट्ठा [aTThA]

सं.पु.
आठ की इकाई, चौपड़ के खेल में आठ अंक का पासा, आठ अंक वाला ताश का पत्ता.

अठवाई [aThavAI]

सं.स्त्री.
पूजा या प्रसाद के लिए बनाई जाने वाली छोटी-बड़ी पूड़ी.

अड़की [aRakI]

सं.स्त्री.
लेन-देन की एक पुरानी बहुत छोटी इकाई.

अड़न्नाथ [aRannAth]

सं.पु.
अनन्नास, एक पौधा जिसकी पत्तियों के रेशों से रस्सी बनती है.

अड़पंचा [aRapancA]

सं.पु.
अवरोध, व्यवधान, किसी कार्य की गति में व्यवधान पैदा करने वाला प्रसंग.

अड़याबौ [aRayAbau]

क्रि.अ.
आड़ा होना, जहाँ बैठे वहीं लेट जाना.

अड़ास [aRAs]

सं.स्त्री.
टिकने के लिए कोई सहारा, रोक, टेक.

अड़ी [aRI]

सं.स्त्री.
जिद, हद.

अड़ीधत [aRIdhat]

वि.
बिना अधिक सोच-विचार के किसी काम पर जुट जाने तथा उससे पीछे न हटने वाला.

अड़ुआ [aRuA]

सं.पु.
व्यवधान, रोक, पत्थर तोड़ने या फाड़ने की बड़ी छैनी.

अड़ोज [aRoj]

सं.स्त्री.
किसी वस्तु को लुढ़कने से बचाने के लिए रोक.

अड्डा [aDDA]

सं.पु.
किसी विशिष्ट कार्य के लिए नियत स्थान.

अड्डी [aDDI]

सं.स्त्री.
देशी जूते का अगला हिस्सा.

अण्डउआ [aNDauA]

सं.पु.
अरण्ड या अण्डी का पेड़.

अण्डबिजौरौ [aNDabijaurau]

सं.पु.
पपीता, अरज ककड़ी.

अत सोभा [at sobhA]

वि.
बहुत शोभायमान.