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अक्षर: द

अक्षर 'द' से शुरू होने वाली कहावतें

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दई के धोकें चूना खा गये।

ठगे गये। लाभ की आशा से काम करने पर उल्टी हानि उठा गये।

दई परोसत खोंप लगी।

सुकुमारता की हद। अथवा कोई अच्छा काम करते हुए बुराई पैदा होना।

दई में मूसर पटक दओ।

शुभ कार्य में विघ्न डाल दिया। बना बनाया काम चौपट कर दिया।

दई-दुआई खरी न खाय। पाछे कोलू चाटन आय।।

बैल दी हुई खरी तो नहीं खाता, पर बाद में कोल्हू चाटता फिरता है। प्रायः लोग कहने और मनाने से काम नहीं करते। अपने आप फिर वही काम भले ही करें।

दगे साँड़ हैं।

नंबरी साँड़ हैं। बदनाम या चलते-पुर्जे आदमी के लिए कहते हैं।

दच्छया1 लैबो तौ आसान, पै सीदो2 दैबो कठिन।

(1-दीक्षा, गुरुमंत्र। 2-ब्राह्मण को दक्षिणा के रूप में दी जाने वाली भोजन की बिना पकी सामग्री।) किसी काम की जिम्मेवारी ले लेना तो आसान है, पर उसका निबाहना कठिन है।

दँतला1 खसम की हाँसी, न साँसी2।

(1-दँतुला, बड़े दाँतों वाला, जिसके दाँत सदैव बाहर निकले रहते हों। 2-साँची, सच्ची, वास्तविक बात।) जिस आदमी की मुखाकृति सदैव एक सी बनी रहे उसके मनोभाव को समझना कठिन होता है।

ददा की दोई मीठी।

सब ओर से अपना लाभ चाहने वाले के लिए।

दद्दा, दार रोटी।

बार-बार एक ही बात कह कर किसी को तंग करना।

दद्दा, हम पाँव सिकोर कें उमानों दै आय; कई, तौ बेटा कौन सुख सें पैर लई।

किसी किसान का लड़का अपने जूतों का नाप देने के लिए गया। अपनी समझ में वह बड़ा होशियार था। यह सोच कर कि जूता छोटा बनने से दाम भी कम देने पड़ेंगे, नाप देते समय पैर सिकोड़ लिया। घर आकर बाप से कहा कि, दद्दा हम पैर सिकोड़ कर नाप दे आये हैं। उत्तर में बाप ने कहा तो बेटा, जूते पहिन कर कौन सा सुख उठा सकोगे ?

दन मदार, पैले पार।

लड़कों को किसी काम के लिए प्रोत्साहित करने अथवा किसी कठिन कार्य के पूरा हो जाने और उससे मुक्ति पाने पर प्रयुक्त।

दबो बानिया देय उधार।

दबा हुआ बनिया उधार देता है।

दम भाई किसके, दम लगाई खिसके।

अपना मतलब गाँठ कर चल देने वालों के लिए कहते हैं।

दम भाई सो निज भाई, और भाई सो सटर-पटर।

एक जगह इकट्ठे होकर बैठने वाले शराबियों और मदकचियों के लिए।

दमरी की दार कों नौ दमरी लगतीं।

कोई वस्तु भले ही सस्ती हो, परन्तु उसके उचित उपयोग अथवा रख-रखाव में प्रायः दुगुना-चौगुना पैसा खर्च हो जाता है।

दमरी की दार न्यारी न्यारी टार।

सहयोग से काम न करना। अपनी डेढ़ चावल की खिचड़ी अलग पकाना।

दमरी की धुरिया, नौ पसेरी दानों।

जितने का माल नहीं, उतने से अधिक उस पर खर्च।

दमरी की बछिया जनम की हत्या।

सस्ती वस्तु अंत में मँहगी और कष्टदायक सिद्ध होती है।

दमरी की भाजी, घर भर राजी।

भाजी की प्रशंसा, जो सस्ती और सुलभ होती है। कंजूस के लिए भी व्‍यंग्‍य में।