अक्षर: अ
अक्षर 'अ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंअपनों सौ मों लैकै रै गये।
अपना सा मुँह लेकर रह गये। अर्थात् चुप हो गये। कुछ कहते नहीं बना।
अपुन खायें, औरे ग्यास बतायें।
स्वयं तो खायें, दूसरों से कहें एकादशी व्रत रखो।
अपुन तौ पाँड़े अठाई1, औरे गैल बतायें।
(1. आततायी, उपद्रवी।) स्वयं तो उपद्रवी, दूसरों को मार्ग बताते हैं।
अपुन बीती कयें कै पर बीती ?
अपनी बीती कहें या पर बीती ? अर्थात् अपनी बात क्या कही जाय ?
अपुन हता, जगन्नथा।
1.अपने हाथ से काम करने वाला मानों संसार का मालिक है। 2.अपने हाथ का काम सबसे बढ़िया होता है।
अपुन हतू पनपथु1।
(1.हाथ की बनी मोटी रोटी जो पानी लगा कर बनायी जाती है।) अपने हाथ से मोटी रोटी ही बना ली। अपने हाथ से चाहे जैसा कार्य कर लिया वह अच्छा ही होता है।
अफरो भूँके की कदर का जाने ?
जिसका पेट भरा है वह भूखे की वेदना को क्या समझे ?
अफरो रोज1 बीघा भर चर जात।
(1.नीलगाय।) रोज का पेट भरा हो तौ भी वह बीघा भर खेत चर जाता है। खर्च होने वाले काम में और अधिक खर्च होता ही है। ऐसे पेटू आदमी के लिए भी कहते हैं जो कहे "मैं कम खाता हूँ"।
अब कौन पुरबिया बूढ़ौ हो गओ।
अभी हम कौन शक्तिहीन हो गये। अब भी हम में काम करने की सामर्थ्य है। पुरबिया अपने जीवट और लड़ाई-झगड़े के लिए प्रसिद्ध हैं।
अबै तौ बिटिया बापई की।
अभी तो बेटी बाप ही की है। अर्थात् अभी कुछ नहीं बिगड़ा। बात अब भी सँभाली जा सकती है। हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार जब तक वर के साथ कन्या की पूरी सात भाँवर नहीं पड़ जाती तब तक उसे पत्नीत्व प्राप्त नहीं होता और उस पर अपने पिता का ही अधिकार माना जाता है। उसी से कहावत बनी।
अबै पराई मताई कौ मौं नई देखो।
अभी पराई माँ का मुँह नहीं देखा। लाड़-प्यार से पली लड़की के प्रति माँ का कथन, कि मेरे पास मनमाना करती हो, ससुराल जाओगी तब पता चलेगा, सास अक्ल दुरुस्त करेगी।
अमानसाई ठेका रखायें, कई, पैलें उन जैसो मों तौ कर लो।
अमानसिंह जैसी दाढ़ी रखायेंगे, कहा, पहिले उन जैसा मुँह तो कर लो। अपने से बड़ों की चाल-ढाल का गलत अनुकरण करने पर प्रयुक्त। अमानसिंह पन्ना-नरेश हृदयशाह के प्रपौत्र और सभासिंह के पुत्र थे। (1809-1815) ये बुन्देला राजाओं में अपनी दानशीलता के लिए प्रसिद्ध रहे हैं।