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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: प

अक्षर 'प' से शुरू होने वाली कहावतें

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पथरा सें मूँड़ मारबो।

असंभव कार्य को करने का प्रयत्न करना।

पनइयन साँप मारबो।

किसी संकट या दुष्ट से छुटकारा पाने के लिए अपर्याप्त साधन से काम लेना।

पर घर कूँदें मूसरचंद।

बिना बुलाये किसी के यहाँ जाना या किसी के काम में हस्तक्षेप करना मूर्खता है।

पर हत बनज, सँदेसन खेती, कड़वारे के दाम।/सजन सावगत जिन करौ, घर हटकत है बाम।।

पराये हाथ से व्यापार, सँदेशों से खेती, और ऋण लेकर साहूकारी नहीं करनी चाहिए।

परदेस कलेस नरेसन कों।

घर से बाहर निकलने पर राजाओं को भी कष्ट होता है।

परदेसी की प्रीत, रैन कौ सपनो।/ पर बन बाँधे मूरखनाथ।

मूर्ख आदमी ही दूसरों की रकम अपने साथ लेकर चलता है।

परबस कौ जीबो बुर(अ) ओ।

दूसरे के वश में रह कर जीना बुरा है।

परसन भईं भवानीं, कौरन लागीं खान।

भवानी प्रसन्न हुईं तौ जूठे टुकड़ों से ही पेट भरने लगीं। मौज में आकर ओछे से ओछा काम भी कर डालना।

पराई आँखन देखबो।

दूसरे के भरोसे काम करना।

पराई आसा, मरै उपासा।

दूसरों की आशा में रह कर भूखों मरना पड़ता है।

पराई कनक पै कंडा बीनबो।

दूसरों के आटे के भरोसे ईधन इकट्ठा करना।

पराई पतरी कौ बड़ो बरा।

दूसरे के हिस्से में आयी हुई वस्तु सदैव अच्छी लगती है।

पराई सरायँ कों धुआँ देतन कोऊ नईं देखत ?

दूसरे के घर में लगी आग कोई नहीं देखता।

पराओ घर थूँक कौ डर।

दूसरों के घर रहने में सुख नहीं।

पराओ मूँड़ पसेरी सो।

किसी दूसरे के दुख-दर्द या पैसे की कोई परवा न करना।

पराये कँदा पै होकें बंदूक घालबो।

दूसरों की ओट लेकर काम करना। टट्टी की ओट से शिकार।

पराये खसम के लानें सत्ती होवो।

किसी दसरे के लिए व्यर्थ कष्ट उठाना। झूठी सहानुभूति दिखाना।

पराये घर की थाती।

दूसरे की धरोहर। ऐसी वस्तु जिसे बहुत दिनों तक घर में रखा न जा सके। विवाह योग्य हुई सियानी लड़की के लिए प्रयुक्त।

पराये धन पै लच्छमी नारायन।

दूसरों के माल पर गुलछर्रे उड़ाना।