अक्षर: प
अक्षर 'प' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंपार भये तौ पार हैं, डूब गये तौ पार।
परिणाम हर हालत में अच्छा होगा, यह सोच कर किसी काम को करने का निश्चय करना।
पारे1 से खटको नईं होत।
(1-पारा, बत्तंन ढकने की मिट्टी की तश्तरी।) पूर्ण निस्तब्धता है। लड़ाई-झगड़ा शान्त है। किसी को किसी से बोलने की हिम्मत नहीं पड़ती।
पाँव में भौंरी है।
ऐसे आदमी के लिए कहते हैं जो किसी एक स्थान पर जम कर न बैठ सके।
पाँवन में का माँदी रचायें ?
पैरों में क्या मेंहदी रचाये हो, (जो इतना सुस्त चलते हो।) शीघ्र काम न करने पर प्रयुक्त।
पावन1 गये भसावन। सैरो2 गयें बसंत।।
(1-त्यौहार। 2-एक प्रकार के गीत जो बसंत में गाये जाते हैं।) बे अवसर का काम। समय के बाद पर्व नहीं मिलता, सैरा बसंत के बाद अच्छा नहीं लगता।
पाँसो परै सो दाव, राजा करै सो न्याव।
भाग्यवश जो सामने आ जाय उसे स्वीकार करना पड़ता है।
पाँसो परै, अनाड़ी जीते।
पाँसा ठीक पड़ने से अनाड़ी भी जीतता है। अथवा पाँसा ठीक पड़ने से ही अनाड़ी जीतता है। भाग्य अनुकूल होने से ही कार्यसिद्धि होती है।