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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: प

अक्षर 'प' से शुरू होने वाली कहावतें

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पाँचें आम, पचीसे इमली।

पाँच वर्ष में आम और पच्चीस में इमली फल देती है।

पाँचें मित्र, पचासे ठाकुर, सौअें सगो, उर एकें चाकर।

पाँच रुपये में मित्र, पचास में जमीदार, सौ में दामाद, और एक रुपये में नौकर संतुष्ट हो जाता है।

पाछली रोटी खायें, पाछली बुद्धि होत।

तवे पर जो सबसे अंत में रोटी सिकती है वह बच्चों को खाने को नहीं दी जाती। लोक-विश्वास है कि उसके खाने से बुद्धि मंद होती है।

पाठे1 को जर पाठो जानें।

(1-दूर तक फैली हुई चौड़ी चट्टान।) जिस आदमी की कठिनाई है वही जानता है।

पाँडेजू की घुरिया हो रइ।

ऐसी वस्तु जिसे चाहे जो माँग ले जाये।

पाँडेजू दोऊ दीन से गये।

दो में से एक भी कार्य सिद्ध नहीं हुआ।

पाँडेजू पछतेयँ, बेईं चनन की खेयँ।

हार कर वही काम करना जो पहिले बहुत मनाने पर भी न किया हो।

पाँत में दुभाँत करबो।

किसी समाज में लोगों से अलग-अलग तरह का व्यवहार करना।

पान पुरानों घृत नयो उर कुलवंती नार। / जे तीनउ तब पाइये जब प्रसन्न करतार।।

पुराना पान, नया घी और कुलीन स्‍त्री के प्राप्‍त होने पर यह माना जाता है कि परमेश्‍वर की कृपा है।

पान-फूल हो रये।

सुकुमार व्यक्ति के लिए।

पानी कौ डूबो सुकौ नई कड़त।

किसी बुरे काम में पड़ने से उसका कुछ-न-कुछ परिणाम भोगना ही पड़ता है।

पानी धरबो।

उत्तेजित करना। उकसाना। गर्म लोहे की धार को पक्‍का (टिकाऊ) बनाना।

पानी नों पौंचे नइयाँ, रेवता से बेंमा छाँटत।

पानी तक पहुँचे नहीं, रेत से ही हाथ-पैर फेंकते हैं। किसी काम के लिए झूठ-मूठ ही परिश्रम करना।

पानी पीजे छान कें, गुरू कीजे जान कें।

पानी छान कर पीना चाहिए और गुरू देखभाल कर करना चाहिए।

पानी बाढ़ो नाव में, घर में बाढ़े दाम।/ दोई हात उलीचिये, यही स्यानो काम।।

नाव में पानी भरने पर उसे निकालना और घर में धन की वृद्धि होने पर उसे खर्च करना ही बुद्धिमानी है।

पानी बिन जिन्दगानी कौन काम की।

मान-सम्मान के बिना जीवन किस काम का ?

पानी भरी खाल।

अनित्य या क्षण-भंगुर शरीर।