अक्षर: ब
अक्षर 'ब' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंबेटा बन कें सबने खाव, बाप बनकें कोऊ नई खा पाऊत।
मीठी बात से जो काम निकलता है वह रोब जमाने से नहीं।
बेटा से बेटी भली जो कुलवंतिन होय।/ बेटा है तौ बउएँ भौत आ जेयँ।
लड़का है तो बहुएँ बहुत आ जायेंगी। साधन है तो काम भी हो जायगा।
बेपारी उर पाउनो तिरिया और तुरंग। / अपने हात सँवारिये लाख लोग होयँ संग।।
व्यापारी, अतिथि, स्त्री और घोड़ा इनको स्वयं ही सँभालना चाहिए, भले ही लाख आदमी साथ हों।
बेल के मारे बमूर तरें गये और बमूर के मारे बेल तरें।
बेल के नीचे गये तो बेल का फल सिर पर गिरा, बबूल के नीचे गये तो काँटे छिद गये। जहाँ जाओ वहीं विपत्ति; कहीं ठिकाना न लगना।
बेल1 मँड़वे चड़ गई।
1-लौकी, तुरई आदि तरकारियों की बेल।) बेल मंडप पर चढ़ गयी। अर्थात किसी प्रकार काम बन गया।
बैठतो राजा और आऊती बऊ।
गद्दी पर बैठनेवाला नया राजा और घर में आनेवाली नयी बहू, इनकी सब सराहना करते हैं।
बैठबे कों ठौर दै दो, परबे कों हम बना लेयँ।
बैठने को जगह दे दो, लेटने को हम बना लेंगे। किसी जगह एक बार थोड़ा अधिकार जम जाने पर बहुत जमाना आसान हो जाता है।
बैठें बैठें खाय से पहाड़ बिला जात।
बैठे-बैठे खाने से पहाड़ भी विलीन हो जाता है। आमदनी के बिना खर्च नहीं चलता।
बैठे से बेगार भली। / बैदई की राँड़ भई।
वैद्य की ही स्त्री विधवा हुई, अर्थात जो वैद्य दूसरों का इलाज करता था वह स्वयं ही बीमार हुआ और मर गया।
बैरा मुंस, घर में खुंस, कछू कत, कछू सुंत।
कोई आदमी बहरा था। घर में स्त्री जब नाराज होती तब वह कुछ तो कहती और पति सुनता कुछ और, इससे स्त्री की नाराजी और बढ़ती। बहरे आदमी के लिए कहते हैं।
बैरागिन1 बाई को देउर जेठ की का लाज ?
(1- संन्यासिनी।) स्वतंत्र आदमी को सच बात कहते में क्या संकोच ?
बैरी कौ मत मानबो, उर तिरिया की सीख। / क्वाँर करें हर जोतनी, तीनऊँ माँगें भीख।।
जो बैरी की सलाह माने, स्त्री के कहने पर चले, और क्वाँर में खेतों की जोताई करे, ऐसे तीनों आदमी भीख माँगते हैं। (रबी की फसल के लिए खेत बहुत पहिले ही तैयार कर लिये जाते हैं। असली जोताई जेठ-असाढ़ में की जाती है, क्वाँर में नहीं।)
बैल चमकना जोत में उर चमकीली नार। / जे बेरी हैं जान के लाज रखे करतार।।
जिस किसान के खेती के काम आने वाले बैल चौंकने-कूदने वाले हों और स्त्री बहुत-बन ठन कर रहती हो तो ये दोनों ही उसके प्राण के शत्रु होते हैं। भगवान ही उसकी लाज रख सकता है।
बैल न कूदै कूदै गौन1। जौ तमासो देखे कौन।।
(1-अनाज भरने की खेस।) जब किसी से कोई आक्षेपजनक बात कही जाय, और वह तो उसका कोई उत्तर न दे, परन्तु दूसरा आदमी आवेश में आकर बोल उठे तब कहते हैं।
बैल सिंगारो, ज्वान मुछारो। गोऊँ जवारो, घी रवारो।।
बैल तो सींगोंवाला, मर्द मूंछोंबाला, गेहूँ जवा की बाल की तरह बड़ी बाल वाला और घी रबादार अच्छा होता है।
बोई सिया को मायको, बई रावन की गैल।
वहीं तो सीता का मायका और वहीं रावण के निकलने का रास्ता! बैर- कैर का संग।