अक्षर: ब
अक्षर 'ब' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंबिना बसीले चाकरी, बिना मूँछ कौ ज्वान।/ जै तीनऊँ फीके लगें, ज्यों कत्था बिन पान।।
बिना सहारे नौकरी नहीं मिलती।
बिना बुलायें आये, बुरये बुरये गीत गाये।
बिना बुलाये किसी के यहाँ नहीं जाना चाहिए।
बिपत बिरोबर सुख नहीं जो थोरे दिन की होय। / बिप्र परौसी अजय घन, बिटियन कौ दरबार। / ऐते पै धन ना घटे पीपर राखो दुआर।। / बिप्र, बै
दु:ख और विपत्तियों की परिस्थितियां।
बियाड़े जाय बो लरका जो बसोर के झारें जिये।
ऐसा लड़का भाड़ में जाय जो बसोर के झाड़ने-फूँकने से जीवित रहे। ऐसी वस्तु किस काम की जिसके लिए किसी तुच्छ व्यक्ति का एहसान लेना पड़े।
बिरिया सी हला लई।
बेर के वृक्ष को हिलाने से जिस प्रकार सब पके फल एक साथ नीचे गिर पड़ते हैं उसी प्रकार किसी को मारपीट कर सब कपड़े-लत्ते आदि छीन लेना।
बिलइया अपनो एक दाव तोऊ छिना राखत।
बिल्ली अपना एक दाँव फिर भी छिपा रखती है। होशियार आदमी अपना सब हुनर दूसरों को नहीं बताता।
बिलइया के दाँत बिलइये नईं लगत।
बिल्ली के दाँत बिल्ली को नहीं लगते। एक चालाक की चालाकी दूसरे पर नहीं चलती।
बिलइया डंडौतें करबो।
झूठा सम्मान करना। विवश होकर किसी के हाथ-पैर जोड़ते फिरना।
बिले में हात तुम डारौ, मंतुर हम पड़त।
साँप पकड़ने के लिए बिल में हाथ तुम डालो, मंत्र हम पढ़ते हैं। स्वयं अलग रह कर, दूसरों को विपत्ति में डालना।
बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेप। / बीतौ ब्याव कुमार कौ भाँड़े लै लै जाव।
कुम्हार के यहाँ विवाह हो जाने पर मिट्टी के चाहे जितने बर्तन उठा लाओ, क्योंकि उसके यहाँ वही अधिक काम में आते हैं। काम निकल जाने पर वस्तु की कद्र नहीं रहती।
बीदे पै सीदो दैने परत।
(1-सीधा, ब्राह्मण को दक्षिणा में दिया जाने वाला आटा-दाल आदि।) चक्कर में फँसने पर आदमी पैसा खर्च करता है।
बुकरिया जैसो मों चलतई रत।
बकरी की तरह मुँह चलता ही रहता है। ऐसे लड़कों के लिए कहते हैं जो दिन भर बकरी की तरह कुछ न कुछ खाते रहते हैं।