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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: ब

अक्षर 'ब' से शुरू होने वाली कहावतें

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बुर (अ) ये काम कौ बुर (अ) ओ हवाल।

बुरे काम का बुरा नतीजा होता है।

बूचई1 कों तौ घी ताब तो।

(1-बूचा ऐसा कुत्ता जिसके कान कटे हों।) बूचा के लिए ही तो घी गरम किया था ! जब कोई फालतू आदमी बीच में आकर चीज हड़प ले जाय।

बूची कों आन ताव1, कानी कों कजरा कौ ताव।

(1-उतावली।) बूची को कोई दूसरा ताव और कानी को काजल का ताव ! जब कोई अयोग्य किसी वस्तु को पाने की इच्छा करे।

बूड़ी गैया बमने जाय, पुन्न होय और टरे बलाय।

बूढी गाय ब्राह्मण को देने से दुहरा लाभ, पुण्य का पुण्य और बला भी टले !!

बूड़ो और बारो बिरोबर होत।

वृद्ध और बालक इन दोनों की प्रकृति एक सी होती है।

बूड़ो खाय, गाँठ कौ जाय।

निकम्मे आदमी को खिलाना बेकार है।

बूड़ो बरद, पाट की नाथ।

बूढ़ा बैल और उसके लिए रेशम की नाथ !

बूड़ो मरै चाय ज्वान, हत्या से काम।

जब कोई ऐसा काम करने के लिए विवश हो जाय कि उससे दूसरों की हानि होती हो तब कहते हैं।

बेई चेत चितावें, बेई बनवास दुआवें।

सीता की ननद के संबंध में कहा गया है कि वही तो राम को सावधान करें और वही सीता को वनवास दिलायें।

बेई दुखन दूबरी, बेई दो असाड़।

गाय जिस दुख से दुबली, वही सामने आया, अर्थात दो असाढ़ हुए। वर्षा के कारण पहिले ही घास नहीं चर पाती थी और अब और भी भूखों मरेगी। विपत्ति पर विपत्ति।

बेई बाई ससरार कों, बेई गुना1 गोंठवे कों।

(1-दहेज में देने के लिए बनायी गयी विशेष प्रकार की पूड़ी, जो किनारों पर गोंठी जाती है।) वही बेटी तो ससुराल जाने के लिए, और वही गुना गोंठने के लिए ! एक ही आदमी को जब छोटा-बड़ा सब काम करना पड़े तब।

बेची घोड़ी कौन जदाद1।

(1-जायदाद, संपत्ति।) जो बस्तु दूसरों को दे दी उसका क्या हिसाब ?

बेटा एक कुल कौ, तौ बेटी दोई कुलन की।

बेटा एक कुल की लाज रखता है तो बेटी दोनों कुलों की।