अक्षर: अ
अक्षर 'अ' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंअपनें हातन अपने पाँव पै कुलरिया मारबो।
अपने हाथ अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना। अपनी हानि आप ही करना।
अपनों अपनों कमाओ, अपनों अपनों खाओ।
जब किसी परिवार के लोग मिल-जुल कर नहीं रहते, अथवा एक साथ काम नहीं करते तब।
अपनों घर सबै सूजत।
अपना घर सबको सूझता है। (1) अपने नफे-तुकसान पर सबकी नजर रहती है। (2) समय पर अपना घर सबको याद आता है।
अपनों पूत, पराओ ढटींगर1।
(1.फालतू आदमी, आवारा।) अपना पुत्र तो पुत्र, दूसरे का ढटींगर। अपने पुत्र की लोग जितना प्यार करते हैं उतना दूसरे के पुत्र को नहीं।
अपनों मरन, जग हाँसी।
अपना तो मरना और दूसरे केवल हँसते हैं। दुःख में कोई साथ नहीं देता।
अपनों मों चीकनों करें फिरत।
अपना मुँह चिकना किये फिरते हैं। केवल अपनी ही चिन्ता करना जानते हैं।
अपनों रूप और पराओ धन सबै भौत दिखात।
अपना रूप और पराया धन सवको बहुत दिखायी देता है।
अपनों लैने का, पराओ देने का ?
अपना लेना क्या, पराया देना क्या ? दोनों में कोई अहसान नहीं।