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बुंदेलखंड विश्वकोश

अक्षर: अ

अक्षर 'अ' से शुरू होने वाली कहावतें

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अपनें मों धनाबाई।

अपने मुँह से अपनी प्रशंसा करना।

अपनें हातन अपने पाँव पै कुलरिया मारबो।

अपने हाथ अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना। अपनी हानि आप ही करना।

अपनों अपनों कमाओ, अपनों अपनों खाओ।

जब किसी परिवार के लोग मिल-जुल कर नहीं रहते, अथवा एक साथ काम नहीं करते तब।

अपनों अपनों दुख सब रोऊत।

अपना-अपना दुखड़ा सब रोते हैं।

अपनों कायदा अपने हात।

अपने सम्मान की रक्षा का ध्यान स्वयं ही रखना चाहिए।

अपनों खता अपने हातन नई फूटत।

अपनी व्याधि अपने हाथ दूर नहीं होती।

अपनों घर देखो।

अपना काम सँभालो। इधर-उधर की बातों में मत पड़ो।

अपनों घर सबै सूजत।

अपना घर सबको सूझता है। (1) अपने नफे-तुकसान पर सबकी नजर रहती है। (2) समय पर अपना घर सबको याद आता है।

अपनों दूर से सूजत।

अपना दूर से सूझता है। अपने आदमी का सब ध्यान रखते हैं।

अपनों पूत, पराओ ढटींगर1।

(1.फालतू आदमी, आवारा।) अपना पुत्र तो पुत्र, दूसरे का ढटींगर। अपने पुत्र की लोग जितना प्यार करते हैं उतना दूसरे के पुत्र को नहीं।

अपनों पेट तौ कुत्ता भर लेत।

अपना पेट तो कुत्ता भी भर लेता है।

अपनों मरन, जग हाँसी।

अपना तो मरना और दूसरे केवल हँसते हैं। दुःख में कोई साथ नहीं देता।

अपनों मों चीकनों करें फिरत।

अपना मुँह चिकना किये फिरते हैं। केवल अपनी ही चिन्ता करना जानते हैं।

अपनों रूप और पराओ धन सबै भौत दिखात।

अपना रूप और पराया धन सवको बहुत दिखायी देता है।

अपनों लैने का, पराओ देने का ?

अपना लेना क्या, पराया देना क्या ? दोनों में कोई अहसान नहीं।

अपनों सूप मोय दै, तें हातन फटक।

अपना सूप मुझे दे, तू हाथों से फटक।

अपनों सो अपनों, पराओ सो सपनो।

समय पर अपना आदमी ही काम आता है, दूसरा नहीं।