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अक्षर: स

अक्षर 'स' से शुरू होने वाली कहावतें

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सभा सुहाते बोलिये जासों रीझै राय।/ समासे के मरे कों कानों रोईअत ?

संध्या के मरे को कहाँ तक रोया जाय? अभी से यह हाल तो कैसे पूरा पड़ेगा ?

समधी, हँड़ा फूटौ है, कै कें का बदला लओ ?

लड़की के विवाह में किसी ने फूटा हंडा दहेज में दिया। वर पक्षवालों की ओर से शिकायत की गयी कि 'समधी, हंडा फूटा है।' इस पर किसी समझदार बराती ने कहा 'कहने से लाभ क्या? क्या कह कर बदलवा लिया?'

समय परे की बात बाज पै झपटे बगुला।

भाग्य विपरीत होने पर दुर्बल भी सबल को सताता है।

समय परे पै जानिये जो नर जैसो होय। / समरथ कों नईं दोस गुसाईं।/ समाचार मड़वा के पाये। जब लाहकौरे1 भाटा आये।।

(1-लहकौर विवाह की एक रीति जिसमें दूल्हा और दुलहिन एक दूसरे के मुँह में कौर देते हैं।) लहकौर में जब भटे का साग आया तो उससे ही पता चल गया कि लड़की वाले बरात का कैसा स्वागत करेंगे।

समां समासे1 जात है, कोदों भर अदरात।

(1-संध्या समय।) साँवाँ और कोदों को कभी-कभी ऐसा रोग लग जाता है कि वे देखते-देखते नष्ट हो जाते हैं।

सयानो कौआ गू में चोंच भिड़ाउत।

जो जितना सयाना होता है वह उतना ही नीचा भी देखता है।

सरग तरैयाँ टोरबो।

आकाश के तारे तोड़ना। असंभव कार्य करना। किसी कार्य में अपनी पूरी शक्ति लगाना।

सरग फटै तौ कानों थींगरा लगाउत ?

विपत्ति का पहाड़ ही टूट पड़े तो कहाँ तक सँभाला जाय ?

सरग सें गिरे बबूर में अटके।

बड़ी विपत्ति से किसी प्रकार निकले तो छोटी में फँस गये।

सरगे आग लगाउत।

स्वर्ग में आग लगाता है, ऐसा आततायी है।

सरमदार अपनी सरम कों मरौ, बेसरम ने कई मोसें डरौ।

शर्मदार ने तो दूसरे का लिहाज किया, परन्तु बेशर्म ने समझा कि यह मुझसे डर गया।