अक्षर: ब
अक्षर 'ब' से शुरू होने वाली कहावतें
arrow_back वापस जाएंबारा बरस में तौ घूरेई की रती फिरत।
बारह वर्ष में तो घूरे के भी दिन फिरते हैं। समय पाकर सब के दिन फिरते है। कभी न कभी अच्छे दिन अवश्य आते हैं।
बारा बरसें दिल्ली में रये, का भार झोंकत रये ?
बारह वर्ष दिल्ली में रहे, क्या भाड़ झोंकते रहे? जब कोई अच्छे वातावरण में रह कर भी कुछ सीख न सके और एक साधारण से काम में भी अपनी मूर्खता प्रकट करे तब।
बारा बरसें सेई कासी, मरन गये मगा की पाटी।
जीवन भर सत्कर्म करते रहने पर भी अंत खराब होना।
बारा मइना की गैल चले, छः मइना की ना चलै।
बारह महीने का रास्ता चलै, छः महीने का नहीं। उतावली ठीक नहीं; सब काम धीरज से करना चाहिए।
बारी1 खेते साय तौ बिध सें कहा बसाय।
(1-खेत की बाड़।) रक्षक ही भक्षक बन जाय तो इसके लिए क्या किया जाय ?
बारे पूत, हरीरी साका1। इन्हें देख जिन गरबो माता।
(1-शाखा, खेती।) छोटी उम्र के बालक और खेत में खड़ी हरी फसल का गवं नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे कभी भी नष्ट हो सकते हैं।
बालक, मूँछ उर नारी, बारे से काय न सँवारी।
बालक, मूँछ और स्त्री ये प्रारंभ से ही सँभालने पर सँभलते हैं।
बालापन में बियाव न भये, तरुनाई रस बस न ठये। / वृद्धापन तीरथ ना गये, ते नर सदा बिबूचे रये।।
बाल्यावस्था में जिनका विवाह नहीं हुआ, युवावस्था में जिन्होंने सुखभोग नहीं किया, और बुढ़ापे में जिन्होंने तीर्थ-यात्रा नहीं की वे मनुष्य सदैव गड़बड़झाले में ही पड़े रहे।
बावन बुद्ध बकरिया में, छप्पन बुद्ध गड़रिया में।
बकरी बहुत होशियार होती है, परन्तु उससे अधिक होशियार होता है गड़रिया, जो उस बकरी को पालता-पोसता है।
बाँस के भिरे में धमोय1।
(1-एक जंगली बूटी जिसके संबंध में कहा जाता है कि यदि वह बाँस के भिरे में उत्पन्न हो जाय तो सबका सब भिरा नष्ट हो जाता है।) अच्छे वंश में बुरे लड़के का उत्पन्न होना।
बासे भात में खुदा कौ का साजौ ?
बासी भात तो किसी प्रकार भी खाने को प्राप्त किया जा सकता है, उसमें भगवान का क्या एहसान ?
बिगनन1 अँसुआ नई आऊत।
(1-बुन्देलखंड में भेड़िये को बिगना कहते हैं।) भेड़ियों को आँसू नहीं आते। कठोर हृदय मनुष्य को दया नहीं आती।